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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 98 · 102/129

कीर्तन 51–100

कीर्तन 98 · Kirtan 98

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

31 source linesपुस्तक पृष्ठ 157–159PDF 168–170

ठाकुर ठकुरानी, प्रेम रूप रस खानी।

(कहुँ देखे आली, ललित त्रिभंगी लाल . . .)

ठाकुर ठकुरानी, प्रेम रूप रस खानी।

विहरति मनमानी, वृंदावन रजधानी।

Source page 158

मेरी राधेरानी सम मेरी राधेरानी,

जाके पाछे पाछे डोलें सारँगपानी।

जाकी हैं दिवानी बानी कमला भवानी,

सोऊ राधेरानी जू की कर अगवानी।

जब जब निकसें सवारी राधेरानी,

पाछे चलि हरि बोलें जय हो महरानी।

जय हो जय हो ठाकुर, जय हो ठकुरानी।

कोटि कमला भवानी करें अगवानी।

बलि बलि ठाकुर, बलि ठकुरानी।

प्रणत पै होड़ करें कौन बड़दानी।

ब्रजरस सिन्धु ठाकुर ठकुरानी।

श्याम गौर रस घोर पियो मनमानी।

मैंने तो “कृपालु” दोनों एकहिं मानी।।

मेरी राधेरानी वृंदावन ठकुरानी।

मेरी राधेरानी प्रेम रूप रस खानी।

जाकी कोटि कमला भवानी नौकरानी।

मैं हूँ राधेरानी जू की मेरी राधेरानी।

मैं हूँ महरानी राधेरानी की दीवानी।

Source page 159

मैं तो वारी जाऊँ कुंज बिहारी पै।

मैं तो वारी जाऊँ बरसाने वारी पै।

मैं तो वारी जाऊँ वारी बनवारी पै।

मैं तो वारी जाऊँ भोरी भारी प्यारी पै।

मैं तो वारी जाऊँ रास बिहारी पै।

मैं तो वारी जाऊँ ब्रज रस वारी पै।

मैं तो वारी जाऊँ मदन मुरारी पै।

मैं तो वारी जाऊँ भानुदुलारी पै।

मैं तो वारी जाऊँ गिरिवर धारी पै।

मैं तो वारी जाऊँ प्यारी प्यारी प्यारी पै।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३102
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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