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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 35 · 39/129

कीर्तन 1–50

कीर्तन 35 · Kirtan 35

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

13 source linesपुस्तक पृष्ठ 82–83PDF 93–94

रस बरसाने वारी बरसाने वारी,

(प्यारी प्यारी भोरी भारी ...)

रस बरसाने वारी बरसाने वारी,

सब मिलि बोलो जय हो, जय हो जय हो प्यारी।

आजा आजा मेरी प्यारी प्यारी महतारी,

तेरे पाछे भाजे भाजे अइहैं बनवारी।

Source page 83

तू ही मेरी थी भी है भी रहेगी भी प्यारी,

एक बार झलक दिखा दे महतारी।

तेरा पर्दा योगमाया बरसाने वारी,

मेरा पर्दा माया कैसे मिलूँ महतारी।

माना मैं पतित अति बरसाने वारी,

तू भी पतित पावनि महतारी।

तेरा तो है तन मन कृपा का ही प्यारी,

करि दे “कृपालु” पै भी कृपा महतारी।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३039
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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