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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 25 · 29/129

कीर्तन 1–50

कीर्तन 25 · Kirtan 25

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

19 source linesपुस्तक पृष्ठ 55–56PDF 66–67

आजा नंदनंदन आजा यशुदा ललन,

(प्यारी प्यारी भोरी भारी . . .)

आजा नंदनंदन आजा यशुदा ललन,

आजा आजा ब्रज गोपीजन जीवनधन।

आजा सतघन चितघन आनँदघन,

आजा आजा ब्रजयुवतिन दृग अंजन।

आजा आके पुनि ना जा यशुमति के सुवन,

आजा आजा तोपै अर्पन तन मन धन।

आजा तोहिं परखत निधिवन मधुवन,

आजा आजा निज लीला धाम वृंदावन।

आजा तेरी पद रज चह ब्रज रज कन,

आजा आजा रस बरसा जा गोवर्धन।

आजा जगमोहन मदन विमोहन,

आजा आजा निज मन मोहन मोहन।

आजा त्रिभुवन वंदन राधिकारमन,

आजा आजा प्रणत जनन मनरंजन।

आजा अब “दारी के” न गारी देंगी गोपीजन,

आजा आजा अब न बनावें घोड़ा गोपजन।

Source page 56

आजा तू तो सदा ते है अधम उधारन,

आजा आजा तू तो है “कृपालु” बिनु कारन।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३029
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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