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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 26 · 30/129

कीर्तन 1–50

कीर्तन 26 · Kirtan 26

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

23 source linesपुस्तक पृष्ठ 56–57PDF 67–68

मेरी भोरी भारी वृषभानुदुलारी,

(प्यारी प्यारी भोरी भारी )

मेरी भोरी भारी वृषभानुदुलारी,

जय हो जय हो जय हो बरसाने वारी प्यारी।

जय हो जय हो श्री वृषभानुदुलारी,

जय हो जय हो रँगीली महल वारी प्यारी।

मेरी ऐसी रँगीली महल वारी प्यारी,

प्यारी ऐसी प्यारी प्यारी आपु जायँ वारी।

प्यारी छवि लखि पिय कह बलिहारी,

मैं तो प्यारी पर बनवारीहूँ को वारी।

तहँ पिय सिर धर जहँ पग प्यारी,

देयँ बुहारी पिय जित जायें प्यारी।

पाछे पाछे चले पिय बोले जय हो प्यारी,

पिय दृग नीचे करि देखे छवि प्यारी।

प्रेम भिखारी पिय दाता मेरी प्यारी,

पिय को बुरा ना कहो बुरा माने प्यारी।

Source page 57

मेरे दोनों प्राण सम पिय अरु प्यारी,

प्यारी भजे पिऊ पिऊ, पिय भजे प्यारी।

मेरी दायीं आँख पिय बायीं आँख प्यारी,

नित नई नई लागे छवि पिय प्यारी।

प्यारी कभू पिय बने, पिय कभू प्यारी,

एक आत्मा हैं द्वै तनु पिय-प्यारी।

प्यारी कहे पिऊ भजु, पिऊ कहे प्यारी,

पै “कृपालु” कहे भजु नित पिय प्यारी।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३030
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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