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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 33 · 37/129

कीर्तन 1–50

कीर्तन 33 · Kirtan 33

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

19 source linesपुस्तक पृष्ठ 79–80PDF 90–91

रस बरसाने वारी बरसाने वारी,

(प्यारी प्यारी भोरी ...)

रस बरसाने वारी बरसाने वारी,

जय हो जय हो जय हो वृषभानुदुलारी।

रस बरसाने वारी बरसाने वारी,

इक बूँद रस की पिला दे मोहिं प्यारी।

रस बरसाने वारी बरसाने वारी,

चाहे अपनाये चाहे ठुकराये प्यारी।

रस बरसाने वारी बरसाने वारी,

तू ही मेरी थी भी है भी रहेगी भी प्यारी।

रस बरसाने वारी बरसाने वारी,

तेरे बिनु जीना भी क्या जीना मेरी प्यारी।

Source page 80

रस बरसाने वारी बरसाने वारी,

दे दो आँसू ले लो प्रेम बड़ी भोरी प्यारी।

रस बरसाने वारी बरसाने वारी,

यदि नहिं आये तो बुला ले मोहिं प्यारी।

रस बरसाने वारी बरसाने वारी,

चुटकी बजाऊँ जब जम्भुवाओ प्यारी।

रस बरसाने वारी बरसाने वारी,

हेरो मेरे “कृपालु” ढ़िग कृपामयी प्यारी॥

ब्रज रस माधुरी · भाग ३037
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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