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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 48 · 52/129

कीर्तन 1–50

कीर्तन 48 · Kirtan 48

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

29 source linesपुस्तक पृष्ठ 101–102PDF 112–113

मेरी प्यारी प्यारी बरसानेवारी प्यारी,

(जय जय राधारमणा . . .)

मेरी प्यारी प्यारी बरसानेवारी प्यारी,

मेरी भानुदुलारी महलन वारी।

मेरी ब्र्रजरस वारी प्यारी,

मेरी गति मति बरसाने वारी प्यारी।

मेरी ऐसी प्यारी बरसाने वारी प्यारी,

जाके पाछे पाछे डोलें ब्रह्म बनवारी।

जब जब चले प्यारी जू की असवारी,

पाछे चलि बोलें जय हो, जय हो, बनवारी।

मेरी ब्रजरस बरसाने वारी प्यारी,

जाके पग चापैं पूर्ण ब्रह्म बनवारी।

जब सोरहो सिंगार करें मेरी प्यारी,

माथे काला टीका देंय ब्रह्म बनवारी।

Source page 102

जब प्यारीजू के पग चापैं ब्रजनारी,

लखि ललचायें कर मीजैं बनवारी।

आगे आगे प्यारी चलें पाछे ब्रजनारी,

वाके पाछे पिय चलें बोलें “जय हो” प्यारी।

जित प्यारी जू पधारें सँग ब्रजनारी,

तित पहले ही दें बुहारी बनवारी।

सब जीवन जीवन वनवारी,

उन वनवारी हुँ कि जीवन प्यारी।

सिंहासन पर बैठे जब प्यारी,

चँवर ढुरावें तब ब्रह्म वनवारी।

जहँ जहँ चरण धरत चल प्यारी,

तहँ तहँ चूमत चल वनवारी।

एक बार बोलो सब जय हो वनवारी,

बार बार बोलो सब जय हो जय हो प्यारी।

जब कोई बोले बोलो जय हो वनवारी,

तब पिय बोले बोलो जय “कृपालु” प्यारी।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३052
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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