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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 50 · 54/129

कीर्तन 1–50

कीर्तन 50 · Kirtan 50

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

19 source linesपुस्तक पृष्ठ 104–105PDF 115–116

राधेरानी ठकुरानी ब्रजरस खानी,

(जय नँदनंदन सुखधाम . . .)

राधेरानी ठकुरानी ब्रजरस खानी,

राधेरानी ठकुरानी ब्रजरस खानी।

मेरी राधारानी सम मेरी राधारानी,

मेरी राधारानी सम मेरी राधारानी।

मेरी राधारानी सम दानी राधारानी,

मेरी राधारानी सम दानी राधारानी।

राधारानी ठाकुरहुँ की ठकुरानी,

राधारानी ठाकुरहुँ की ठकुरानी।

मेरो ठाकुर ठाकुर ठकुरानी,

मेरो ठाकुर ठाकुर ठकुरानी।

विहरत ब्रज ठाकुर ठकुरानी,

विहरत ब्रज ठाकुर ठकुरानी।

राधेरानी महरानिहुँ की महरानी,

राधेरानी महरानिहुँ की महरानी।

Source page 105

तुम भी मोहिं भूलो नहिं मेरी राधारानी,

मैं भी तोहिं भूलूँ नहिं मेरी राधारानी।

जग के ठाकुर की ठकुरानी,

हैं “कृपालु” राधारानी ब्रजरस खानी।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३054
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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