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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 81 · 85/129

कीर्तन 51–100

कीर्तन 81 · Kirtan 81

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

15 source linesपुस्तक पृष्ठ 137PDF 148

जय जय भानुदुलारी प्यारी,

(गोविन्द जय जय . . .)

जय जय भानुदुलारी प्यारी,

जय जय नँदनंदन बनवारी।

जब चह रास करन बनवारी,

मुकुट उतारि धरत पग प्यारी।

सब जग वारी लखि बनवारी,

बनवारी वारी लखि प्यारी।

सब जग आत्मा है बनवारी,

बनवारी हूँ आत्मा प्यारी।

प्राण हमारो है बनवारी,

प्राण प्राण हैं भानुदुलारी।

श्रुति कह रस स्वरूप बनवारी,

रसिक बनाय दीन तिन प्यारी।

तबहिं “कृपालु” भये बनवारी,

जबहिं कृपा किय भानुदुलारी।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३085
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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