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जय जय भानुदुलारी प्यारी,
(गोविन्द जय जय . . .)
जय जय भानुदुलारी प्यारी,
जय जय नँदनंदन बनवारी।
जब चह रास करन बनवारी,
मुकुट उतारि धरत पग प्यारी।
सब जग वारी लखि बनवारी,
बनवारी वारी लखि प्यारी।
सब जग आत्मा है बनवारी,
बनवारी हूँ आत्मा प्यारी।
प्राण हमारो है बनवारी,
प्राण प्राण हैं भानुदुलारी।
श्रुति कह रस स्वरूप बनवारी,
रसिक बनाय दीन तिन प्यारी।
तबहिं “कृपालु” भये बनवारी,
जबहिं कृपा किय भानुदुलारी।।
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