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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 20 · 24/129

कीर्तन 1–50

कीर्तन 20 · Kirtan 20

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

16 source linesपुस्तक पृष्ठ 48PDF 59

तोपै वारी वारी नथबेसर वारी।

(प्यारी प्यारी भोरी भारी बरसाने वारी)

तोपै वारी वारी नथबेसर वारी।

कनक मुकुट सिर चूनरि वारी।

चोरी चोरी पिय चित चोरनि वारी।

पिय लखि सक नहिं चितवनि प्यारी।

पिय मुरछित लखि मुसुकनि प्यारी।

लख इक टक निज मुख छवि प्यारी।

पिय तनु काँपत परसत प्यारी।

मेरी प्यारी ऐसी प्यारी, मोहे आपु प्यारी।

मदन हुँ मोहे जिन, तिन मोहे प्यारी।

वाके पाछे डोले पिय, जो भी भजे प्यारी।

लखि नहिं सक पिय, ऐसी छवि प्यारी।

देयँ बुहारि पिय महलन प्यारी।

धरत मुकुट पिय चरनन प्यारी।

ध्यावें छवि मुरली में गावें गुन प्यारी।

नहिं कोउ अस “कृपालु” जस प्यारी।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३024
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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