कीर्तन 51–100
कीर्तन 77 · Kirtan 77
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
राधे कृष्ण राधे कृष्ण राधे कृष्ण राधे राधे।
(मैं तो प्यारी प्यारी प्यारी पर वारी वारी जाऊँ)
राधे कृष्ण राधे कृष्ण राधे कृष्ण राधे राधे।
राधे कृष्ण राधे कृष्ण राधे कृष्ण राधे राधे।।
तू ही मेरी गति तू ही मति तू ही रति राधे।
तोहिं तजि जाऊँ कित तू ही बता दे राधे।।
जग शिशु भी न जाने कौन मेरी माँ है राधे।
माँ ही तो जनावे शिशु कहँ मैं हूँ माँ राधे।।
माना मैंने माना नहिं तू ही इक मेरी राधे।
यामे तो है दोषी तेरी गुणमयी माया राधे।।
उर ते लगाये चाहे पग ठुकराये राधे।
पाछा नहिं छोड़ूँ चाहे प्राण चले जाय राधे।।
Source page 132
तुम भी मोहिं भूलो नहिं भोरी भारी प्यारी राधे।
पाछा नहिं छोड़ूँ चाहे प्राण चले जाय राधे।।
ब्रजरस की ही दे दे प्याली वामें प्यारी राधे।
गौर श्याम रस घोरि छकि के पिला दे राधेे।।
इह लोक परलोक सुख ना दे ना दे राधे।
तेरे सुख में ही सुख मानना सिखा दे राधे।।
लेना लेना ही तो मैंने सीखा है सदा से राधे।
कृपा करु अब देना देना सिखा दे राधे।।
गुरु ने जनाया अब जाना तू ही मेरी राधे।
है “कृपालु” को भरोसा कभू तो मिलेगी राधे।।
राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे।
भुक्ति मुक्ति ना दे मोहिं प्रेम सुधा दे।।
तुम भी मोहिं भूलो नहिं गोविन्द राधे।
मैं भी तोहिं भूँलूँ नहिं पल छिन आधे।।
Source page 133
राधे कृष्ण राधे कृष्ण राधे कृष्ण राधे राधे।
राधे कृष्ण राधे कृष्ण राधे कृष्ण राधे राधे।।
भुक्ति मुक्ति बैकुण्ठ ना दे ना दे ना दे राधे।
श्याम गौर रस घोल छकि के पिला दे राधे।।
भुक्ति मुक्ति बैकुण्ठ ना दे ना दे ना दे राधे।
बरबस ब्रजरस सिंधु में डुबा दे राधे।।
