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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 30 · 34/129

कीर्तन 1–50

कीर्तन 30 · Kirtan 30

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

23 source linesपुस्तक पृष्ठ 71–72PDF 82–83

रस बरसाने वारी, बरसाने वारी।

(प्यारी प्यारी भोरी भारी)

रस बरसाने वारी, बरसाने वारी।

भोरी भारी प्यारी प्यारी, बरसाने वारी।

नथबेसर वारी, बरसाने वारी।

जय हो जय हो जय हो जय हो, बरसाने वारी।

आजा आजा सुकुमारी, बरसाने वारी।

आके कभू ना जा प्यारी, बरसाने वारी।

प्यारी ऊँचे महलन वारी, बरसाने वारी।

ब्रजरस बरसाने वारी, बरसाने वारी।

ब्रजरस चुवे तनु प्यारी, बरसाने वारी।

मादन रस वारी प्यारी, बरसाने वारी।

क्रंदन सुनि भाजै प्यारी, बरसाने वारी।

Source page 72

तू ही तो है मेरी प्यारी, बरसाने वारी।

मैं भी तो हूँ तेरी प्यारी, बरसाने वारी।

पाछा नहीं छोडूँ प्यारी, बरसाने वारी।

तेरा है भरोसा भारी, बरसाने वारी।

जापै वारी वारी बनवारी, बरसाने वारी।

तू तो है “कृपालु” बिनु कारण प्यारी।

मैं तो ये ही गुन पर वारी वारी प्यारी॥

करहु कृपा की कोर मोर गौर हरि,

चरण शरण लई तोर मोर गौर हरि।

रसिकन को सिरमोर मोर गौर हरि।

ब्रज बनितनि चित चोर मोर गौर हरि।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३034
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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