लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content

ब्रज रस माधुरी

PART IV · KIRTAN 15 · 18/20

कीर्तन 1–16

कीर्तन 15 · Kirtan 15

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

315 source linesपुस्तक पृष्ठ 29–46PDF 18–27

राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे,

(प्यारी प्यारी भोरी भारी . . .)

राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे,

राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे।

हरि गुरु दोनों में ही गोविन्द राधे,

दोनों स्वामी अरु दोनों दास बता दे।

गुरु से ही तत्त्वज्ञान गोविन्द राधे,

पुनि पुनि सुनि मन बुधि में बिठा दे।

तू तो माँगे शुद्ध मन गोविन्द राधे,

गुरु ही अशुद्ध मन शुद्ध करा दे।

तू तो है बनों का साथी गोविन्द राधे,

गुरु तो सदा सदा की बिगरी बना दे।

गुरु तो है माता सम गोविन्द राधे,

सुत को सजा के हरि गोद बिठा दे।

गुरु को बिठा दे उर गोविन्द राधे,

श्यामाश्याम अइहैं आपु गलबहियाँ दै।

हरि के अधीन जग गोविन्द राधे,

गुरु के अधीन हरि हरि ही बता दे।

Source page 30

हरि कृपा गुरु मिले गोविन्द राधे,

गुरु कृपा हरि मिले तत्त्व बता दे।

हरि चह गुरु सुख गोविन्द राधे,

गुरु चह हरि सुख तत्त्व बता दे।

हरि गुरु तनु दो हैं गोविन्द राधे,

पै भीतर दोऊ एक बता दे।

दाता दो ही हरि गुरु गोविन्द राधे,

शेष सब जग है भिखारी तोहिं का दे।

जग विद्यालय गोविन्द राधे,

संत पाठक शेष शिष्य बता दे।

हरि गुरु दोनों एक गोविन्द राधे,

स्वार्थ दृष्टि से है गुरु बड़ा ही बता दे।

गुरु सेवा हरि सेवा गोविन्द राधे,

दोनों ही हैं एक अस रसिक बता दे।

जापै हरि की कृपा हो गोविन्द राधे,

वाय जग वैभव रहित बना दे।

तीन बार वेद मधि गोविन्द राधे,

विधि ने कहा मन हरि में लगा दे।

Source page 31

सार उपनिषदों का गोविन्द राधे,

मन हरि गुरु में ही सदा को लगा दे।

हरि नाम नामी एक गोविन्द राधे,

यह विश्वास निज बुधि में बिठा दे।

हरि सब उर में हैं गोविन्द राधे,

यह मत वेद सम्मत है बता दे।

राधे नाम रस ऐसा गोविन्द राधे,

भगवान निज भगवत्ता भुला दे।

राधे नाम रस ऐसा गोविन्द राधे,

जितना पिओ प्यास उतनी बढ़ा दे।

राधे नाम रस ऐसा गोविन्द राधे,

भगवान शिव को शिवानी बना दे।

राधे नाम रस ऐसा गोविन्द राधे,

ब्रह्म को भी प्रेम भिखारी बना दे।

राधे नाम रस ऐसा गोविन्द राधे,

सर्वज्ञ ब्रह्म को भी अज्ञ बना दे।

राधे नाम रस ऐसा गोविन्द राधे,

आनन्द ब्रह्म को भी रोना सिखा दे।

Source page 32

राधे नाम रस ऐसा गोविन्द राधे,

भवानी बानी को नौकरानी बना दे।

हरि के थे चार वर्ण गोविन्द राधे,

नर ने बनाये लाखों वर्ण क्‍यों बता दे।

मन सा न मीत कोउ गोविन्द राधे,

जग से हटा के हरि गुरु में लगा दे।

'गा' को लगा के मन गोविन्द राधे,

पिछला बिगारा अब 'गा' को हटा दे।

अभी भजु अभी भजु गोविन्द राधे,

जाने कब काल तेरा टिकट कटा दे।

हरि मिट्टी जग घट गोविन्द राधे,

जग घट की है आदि अंत बता दे।

निराकार ब्रह्म मिट्टी गोविन्द राधे,

साकार ब्रह्म कृष्ण हीरा बता दे।

तीनों तजु सातों तजु गोविन्द राधे,

ग्यारहवें में ग्यारहों को लगा दे।

चार लुटेरे लूटें गोविन्द राधे,

इनते बचे तो पाँचवाँ रस चाखे।

Source page 33

एक पति दस सौतें गोविन्द राधे,

निज निज ओर खींचि भुर्ता बना दे।

हरि नित उर रह गोविन्द राधे,

मूढ़ ढूँढ़े चारों धाम काहे बता दे।

एक क्षण का कुसंग गोविन्द राधे,

पचास आगे दो शून्य बढ़ा दे।

चार वृक्ष चार फल गोविन्द राधे,

जो फल खाना चाहे सोई लगा दे।

जो भी आय जाय गोविन्द राधे,

कोई कमा के जाय कोई गवाँ दे ।

अंत मति सोइ गति गोविन्द राधे,

याते छिन छिन मन हरि में लगा दे।

हरि गुरु में ही नित गोविन्द राधे,

तन मन धन इन तीनों को लगा दे।

तन धन न हो जो तो गोविन्द राधे,

मन से ही हरि गुरु स्मरण करा दे।

विज्ञ अज्ञ पावें लक्ष्य गोविन्द राधे,

अल्पज्ञ को तो अभिमान गिरा दे।

Source page 34

तुम भी मोहिं भूलो नहिं गोविन्द राधे,

मैं भी तोहिं भूलूँ नहिं ऐसी बना दे।

स्वामी सखा सुत पति गोविन्द राधे,

चार चार नाते तोसों कोई तो निभा दे।

तेरे मेरे मिलन में गोविन्द राधे,

बाधा तेरी माया वाय सदा को भगा दे।

तू ही मेरा मैं भी तेरा गोविन्द राधे,

बीच में है माया वाय मारि भगा दे।

मैं भी तेरा मेरा तेरा गोविन्द राधे,

जनम जनम का भिखारी तोहिं का दे।

सुख के भिखारी सब गोविन्द राधे,

तू ही इक सुखदाता दे चाहे ना दे।

पिछला बिगारा मैंने गोविन्द राधे,

अगला अकारण कृपा ते बना दे।

शरण शरण तेरी गोविन्द राधे,

प्यार करे चाहे पग ठुकरा दे।

तेरा पर्दा योगमाया गोविन्द राधे,

मेरा पर्दा माया दोनों पर्दा उठा दे।

Source page 35

तेरा तन भी है काला गोविन्द राधे,

मेरा मन भी है काला जोरी बना दे।

मदनहूँ मोहा तूने गोविन्द राधे,

मैं तो मानूँ तब मोहिं मोहि के दिखा दे।

जो तू माँगे शुद्ध मन गोविन्द राधे,

नाम पतितपावन भी हटा दे।

तू तो बिनु कारण गोविन्द राधे,

भक्ति आदि साधना का नियम हटा दे।

इतनी तो कृपा करु गोविन्द राधे,

आते जाते मेरी ओर लखि मुस्कुरा दे।

भुक्ति मुक्ति माँगूँ नहिं गोविन्द राधे,

गरबाँही दै के टुक झलक दिखा दे।

उर में तो रह नित गोविन्द राधे,

बाहर आके टुक झलक दिखा दे।

उर में तो रह नित गोविन्द राधे,

बाहर आने में लाज क्‍या बता दे।

बिनु पूछे चोरी चोरी गोविन्द राधे,

मेरे उर रह औ किराया भी ना दे।

Source page 36

और कछु दे या ना दे गोविन्द राधे,

तेरा सुख चाहने की चाह बढ़ा दे।

जो भी दै के सुख पाये गोविन्द राधे,

सोई दे दे और कछु ना दे ना दे ना दे।

जहाँ रहूँ जैसे रहूँ गोविन्द राधे,

तेरा सुख सोचूँ करूँ और को भुला दे।

कुछ भी ना देना हो तो गोविन्द राधे,

आके दोनों हाथों से अँगुठा दिखा दे।

कुछ भी ना देना हो तो गोविन्द राधे,

आके दूँगा दूँगा कहि धैर्य दिला दे।

दासी मारे सुत कहँ गोविन्द राधे,

माँ बैठी देखे कैसी माँ है बता दे।

तेरी माया ने भुलाया गोविन्द राधे,

याते तोहिं भूला मेरा दोष का बता दे।

गर्त गिरा रोये सुत गोविन्द राधे,

पिता बैठे देखे कैसा पिता है बता दे।

मैं भी तेरा मेरा तेरा गोविन्द राधे,

मेरा यदि कछु भी है नाम बता दे।

Source page 37

जग कामना मिटे ना गोविन्द राधे,

जग शब्द को मिटा दे श्याम लिखा दे।

जग भोग विष सम गोविन्द राधे,

हरि नाम मोहन भेद बता दे।

अपनी न माने तो भी गोविन्द राधे,

झूठमूठ ही निज हाथ को हिला दे।

बुरी भी लगूँ जो मैं गोविन्द राधे,

मेरी ओर लखि निज मुख बिचका दे।

मैंने ही दिया है तोहिं गोविन्द राधे,

नाम पतितपावन न भुला दे।

मेरे पापों से डरे जो गोविन्द राधे,

नाम पतितपावन क्‍यों बता दे।

माना मैं पतित सुत गोविन्द राधे,

पूतना ते बड़ क्‍या मैं पतित बता दे।

जानता हूँ तू ही मेरा गोविन्द राधे,

पै मन माने नहिं याय मनवा दे।

तोको कभू देखा नहिं गोविन्द राधे,

ध्यान करूँ मैं कैसे झलक दिखा दे।

Source page 38

मन मनमानी करे गोविन्द राधे,

झलक दिखा के याय बंदी बना दे।

मेरा मन चंचल गोविन्द राधे,

तू तो अति चंचल जोरी बना दे।

मेरा मन त्रिगुणी है गोविन्द राधे,

तू भी तो त्रिभंगी जोरी बना दे।

मन मृगजल माँगे गोविन्द राधे,

याय निज प्रेमसिन्धु मध्य डुबा दे।

ग्राह ते बचाया गज गोविन्द राधे,

निज सुत को भी माया ग्राह ते बचा दे।

तू तो जग मोहन गोविन्द राधे,

मैं तो तब मानूँ मोहिं मोहि के दिखा दे।

डर को डराने वाले गोविन्द राधे,

डरि गये मेरे पाप से क्‍यों बता दे।

तेरा रूपध्यान करि गोविन्द राधे,

निष्काम आँसू बहाना सिखा दे।

जग हित रोता रहा गोविन्द राधे,

गोपी गीत जैसा रोना गाना सिखा दे।

Source page 39

और कछु माँगूँ नहिं गोविन्द राधे,

साधना में मेरा रूपध्यान करवा दे।

ऐसी वेदना दे दे गोविन्द राधे,

जो तोहिं मिलने को विवश करा दे।

जग राग रावण गोविन्द राधे,

हरिभक्ति अग्नि बाण द्वारा जला दे।

और कछु माँगूँ नहिं गोविन्द राधे,

जग चिन्तन नौ दो ग्यारह करा दे।

दर्शन दे या ना दे गोविन्द राधे,

दर्शन हित नित रोना सिखा दे।

दर्शन दे या ना दे गोविन्द राधे,

दर्शन की व्याकुलता बढ़ा दे।

दरस ना देना हो तो गोविन्द राधे,

साफ साफ आके मेरे सामने बता दे।

कब दोगे दर्शन गोविन्द राधे,

आके चोरी चोरी मेरे कान में बता दे।

तेरे दर्शन बिन गोविन्द राधे,

मेरा पल पल जनु कलप बना दे।

Source page 40

आये अथवा ना आये गोविन्द राधे,

योगमाया लगा दे माया को भगा दे।

मायापुर पाया दुःख गोविन्द राधे,

कोई कृपा करि कान्हपुर पहुँचा दे।

यदि कछु देना ना हो गोविन्द राधे,

यह बात मेरे सामने आ बता दे।

जो ना आये सामने तो गोविन्द राधे,

चरण कमल की झलक दिखा दे।

चरण दिखाये जो ना गोविन्द राधे,

मीठी मीठी मुरली की तान सुना दे।

तानहूँ सुनावे जो न गोविन्द राधे,

गोपीगीत जैसा मोहिं गीत सिखा दे।

यदि अधिकारी मैं ना गोविन्द राधे,

मेरे उर काहे रह यह तो बता दे।

मेरा बोलना बुरा तो गोविन्द राधे,

आके मेरा मुख पीतपट से बँधा दे।

मुख खोलने का डर गोविन्द राधे,

हो तो प्यारी चुनरी से कर को बँधा दे।

Source page 41

लेना काम देना प्रेम गोविन्द राधे,

लेना देना दोनों व्यापार बता दे।

कामना भगाओ जनि गोविन्द राधे,

जग कामना को हरि कामना बना दे।

रिद्धि सिद्धि निधि ना दे गोविन्द राधे,

गोपीजन जैसा गोपी प्रेम दिला दे।

सोई पढ़ो सोई सुनो गोविन्द राधे,

जो तेरा कृष्ण प्रेम और बढ़ा दे।

हरि भजें भक्तन गोविन्द राधे,

भक्त भजें हरि विधि बुधि भरमा दे।

कर्म योग ज्ञान आदि गोविन्द राधे,

भक्ति आगे माँगे भीख फल तो दिला दे।

कर्म योग ज्ञान तीनों गोविन्द राधे,

स्वर्ग सिद्धि आत्मज्ञान क्रम ते दिला दे।

कर्म योग ज्ञान क्‍या हैं गोविन्द राधे,

भक्ति महादेवी भगवान को झुका दे।

प्रेम के अधीन हरि गोविन्द राधे,

हरि के अधीन ज्ञान आदि हैं बता दे।

Source page 42

चौथा पाँचवाँ ना दे गोविन्द राधे,

देना है तो सीधे सीधे पहला दिला दे।

कर्मी योगी ज्ञानी गोविन्द राधे,

कृष्ण प्रेमी ही है निष्काम बता दे।

ज्ञानी कहे सोऽहं सोऽहं गोविन्द राधे,

भक्त कहे ना ना पाछे 'दा' भी लगा दे।

कृष्ण भक्ति युक्त हो तो गोविन्द राधे,

श्वपच भी बोले जो तो शीश झुका दे।

कृष्ण भक्ति युक्त हो तो गोविन्द राधे,

शिशु भी बोले जो तो शीश झुका दे।

भक्ति की शक्ति देखो गोविन्द राधे,

भगवान की भी भगवत्ता भुला दे।

जो था ईश्वरेश्वर गोविन्द राधे,

भक्ति वाय दासानुदास बना दे।

प्रेम सुधा का जो गोविन्द राधे,

अधिकारी ना हो तो अधिकारी बना दे।

अधिकारी बनाने को गोविन्द राधे,

एक बार निज बाँकी झाँकी दिखा दे।

Source page 43

झाँकी दिखाये ना तो गोविन्द राधे,

एक बार मुरली की तान सुना दे।

पुरुषोत्तम राम गोविन्द राधे,

वाय शबरी जूठे बेर खिला दे।

तेरा चोरी जारी दोष गोविन्द राधे,

जग को बताऊँ ना जो दरस दिखा दे।

ऊखल बद्ध ब्रह्मा गोविन्द राधे,

रो के कहे मोहिं मुक्त करा दे।

सबसे बड़ा है हरि गोविन्द राधे,

दिव्य प्रेम हरि को भी छोटा बना दे।

प्रेम की अनेक विधि गोविन्द राधे,

मोको ब्रजगोपियों का प्रेम दिला दे।

आत्माराम श्याम को भी गोविन्द राधे,

गोपी प्रेम ऐसा गोपीराम बना दे।

गोपी प्रेम को तो देखो गोविन्द राधे,

जग को नचाने वाले को भी नचा दे।

जग को नचावें हरि गोविन्द राधे,

गोपीप्रेम हरि को भी ताली पै नचा दे।

Source page 44

जेहि माया जग नाचे गोविन्द राधे,

वाय अँगूठा छाप गोपी नचा दे।

प्रेम महिमा को देखो गोविन्द राधे,

जगत पिता को नन्दपूत बना दे।

प्रेम महिमा को देखो गोविन्द राधे,

माँ की गोद हित सुखघन को रुला दे।

प्रेम महिमा को देखो गोविन्द राधे,

सर्वज्ञ को भी ब्रज अज्ञ बना दे।

प्रेम महिमा को देखो गोविन्द राधे,

ब्रह्म को सखाओं का घोड़ा बना दे।

प्रेम महिमा को देखो गोविन्द राधे,

यशुदा की साँटी महाकाल को डरा दे।

प्रेम महिमा को देखो गोविन्द राधे,

ब्रह्म को भी ग्वाल जूठे कौर खिला दे।

चल मन वृंदावन गोविन्द राधे,

वहाँ कोई प्रेम मंदिर है दिखा दे।

प्रेम मंदिर ऐसा गोविन्द राधे,

सीता राम राधे श्याम संग दिखा दे।

Source page 45

प्रेम मंदिर वाले गोविन्द राधे,

दिव्य गोपियों से दिव्य प्रेम दिला दे।

मैं तो तेरा नित्य दास गोविन्द राधे,

दास यदि माँगे व्यापारी बता दे।

और कछु माँगूँ नहिं गोविन्द राधे,

तेरे सुख को ही सुख मानना सिखा दे।

कुसुम सरोवर गोविन्द राधे,

श्यामा श्याम लीला धाम रसिक बता दे।

कृष्णभक्ति हीन हो तो गोविन्द राधे,

ब्रह्मा भी बोले जो तो मुँह बिचका दे।

कृष्णभक्ति हीन हो तो गोविन्द राधे,

जो भी कोई बोले वाय डाँटि भगा दे।

भुक्ति मुक्ति डाकिनी गोविन्द राधे,

इनसे बचे जो सोइ प्रेमी बता दे।

तू भी बड़ा चंचल गोविन्द राधे,

मेरा मन चंचल दोनों को लड़ा दे।

सब के ही उर रह गोविन्द राधे,

यह विश्वास मेरे उर में बिठा दे।

Source page 46

सब उर भी है व्यापक भी है राधे,

गोलोक भी है सच क्‍या है बता दे।

राधे कहे श्याम भजो, श्याम कहे राधे,

मेरी मानो भजो नित तुम श्याम राधे।

जो न बोले कीर्तन गोविन्द राधे,

अगले जनम हरि गूँगा बना दे।

राधे भजें गोविन्द गोविन्द राधे,

हम बड़ भागी भजें गोविन्द राधे।

राधे बिनु श्याम आधे श्याम बिनु राधे,

चाहे कहु श्याम या ‘कृपालु’ कहु राधे॥

ब्रज रस माधुरी · भाग ४018
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 4. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

Official literature reference · Official full collection · Official author website · Read as text