लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content

ब्रज रस माधुरी

PART IV · Front matter · 3/20

प्रारम्भिक पृष्ठ

पुस्तक परिचय · About the book

22 source linesप्रारम्भिक पृष्ठPDF 2–3

प्राक्कथन

पुस्तक के नाम से ही पुस्तक की विषय-सामग्री का

स्पष्टीकरण हो जाता है। दिव्यानन्द के अनेकों स्तर हैं,

जिनमें सर्वश्रेष्ठ है– ब्रजरस। उस ब्रजरस की प्राप्ति

श्री राधा-कृष्ण की निष्काम रागानुगा भक्ति के द्वारा

ही संभव है। रागानुगा-भक्ति दास्य, सख्य, वात्सल्य,

माधुर्य इन चार भावों से की जाती है। इन चारों भावों

में भी माधुर्य भाव सर्वश्रेष्ठ है; क्योंकि प्रथम तो उसमें

अन्य समस्त भावों का समावेश हो जाता है और दूसरा

कारण यह है कि इसी माधुर्य भाव की निष्काम भक्ति

द्वारा ब्रजरस के सर्वश्रेष्ठ स्तर कुंज रस की प्राप्ति हो

सकती है। बस! यह अन्तिम कक्षा है, जहाँ तक कोई

जीव जा सकता है। उस सर्वोच्च लक्ष्य की प्राप्ति-हेतु

साधक के हृदय में जिन भावों की पुष्टि परमावश्यक

है, उन्हीं को इस पुस्तक में संकलित संकीर्तनों में

PDF page 3

अभिव्यक्त किया गया है। भगवदनुरागी जन इस पुस्तक

से अवश्य ही कुछ न कुछ लाभ प्राप्त कर सकेंगे, ऐसी

आशा है।

हरेर्नामैव नामैव नामैव मम जीवनम्।

कलौ नास्त्येव नास्त्येव नास्त्येव गतिरन्यथा॥

(नारद पुराण)

जगद्गुरु कृपालु

ब्रज रस माधुरी · भाग ४003
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 4. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

Official literature reference · Official full collection · Official author website · Read as text