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पुस्तक परिचय · About the book
प्राक्कथन
पुस्तक के नाम से ही पुस्तक की विषय-सामग्री का
स्पष्टीकरण हो जाता है। दिव्यानन्द के अनेकों स्तर हैं,
जिनमें सर्वश्रेष्ठ है– ब्रजरस। उस ब्रजरस की प्राप्ति
श्री राधा-कृष्ण की निष्काम रागानुगा भक्ति के द्वारा
ही संभव है। रागानुगा-भक्ति दास्य, सख्य, वात्सल्य,
माधुर्य इन चार भावों से की जाती है। इन चारों भावों
में भी माधुर्य भाव सर्वश्रेष्ठ है; क्योंकि प्रथम तो उसमें
अन्य समस्त भावों का समावेश हो जाता है और दूसरा
कारण यह है कि इसी माधुर्य भाव की निष्काम भक्ति
द्वारा ब्रजरस के सर्वश्रेष्ठ स्तर कुंज रस की प्राप्ति हो
सकती है। बस! यह अन्तिम कक्षा है, जहाँ तक कोई
जीव जा सकता है। उस सर्वोच्च लक्ष्य की प्राप्ति-हेतु
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अभिव्यक्त किया गया है। भगवदनुरागी जन इस पुस्तक
से अवश्य ही कुछ न कुछ लाभ प्राप्त कर सकेंगे, ऐसी
हरेर्नामैव नामैव नामैव मम जीवनम्।
