लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content

ब्रज रस माधुरी

PART IV · KIRTAN 9 · 12/20

कीर्तन 1–16

कीर्तन 9 · Kirtan 9

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

34 source linesपुस्तक पृष्ठ 20–21PDF 14

पिय प्यारी पिय प्यारी प्यारी प्यारी पिय प्यारी।

(जय जय पिय प्यारी . . .)

पिय प्यारी पिय प्यारी प्यारी प्यारी पिय प्यारी।

पिय तो वृंदाविपिन बिहारी,

प्यारी बरसाने वारी।

प्यारी ते प्यारे बनवारी,

प्यारे ते प्यारी प्यारी।

पिय को तनु नीलो रंग वारो,

प्यारी तनु पीलो वारी।

पिय तो चपल चपलताहूँ ते,

अति भोरी भारी प्यारी।

पिय तो असुरन मारधाड़ कर,

ब्रजरस बाँटें नित प्यारी ।

पिय की गति मति रति सब टेढ़ी,

अति सीधी सादी प्यारी।

पिय भी लागे सबको प्यारो,

प्यारी बीस लगे प्यारी।

Source page 21

पिय प्यारी में होड़ लगे जब,

हारें पिय जीतें प्यारी।

पिय तो सबके प्राण वेद कह,

प्राणहुँ ते प्यारी प्यारी।

मम प्यारो प्यारो मम प्यारो,

मम प्यारी प्यारी प्यारी।

प्यारे पर प्यारी वारी,

प्यारी पर वारी बनवारी।

प्यारी कह भजु बनवारी अरु,

बनवारी कह भजु प्यारी।

मेरी मानहु नर नारी सब,

भजिये बनवारी प्यारी।

रूपसिन्धु मानहु बनवारी,

प्रेम सिन्धु मानहु प्यारी।

होड़ होय जब इन दोनों में,

न तु पिय न तु प्यारी हारी।

श्रुति ‘कृपालु’ कह प्यारी ही पिय,

पिय ही बनि गये हैं प्यारी ॥

ब्रज रस माधुरी · भाग ४012
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 4. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

Official literature reference · Official full collection · Official author website · Read as text