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पुस्तक परिचय · About the book
पिछले आवरण का परिचय
वर्तमान काल में जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज विश्व के इतिहास में
पंचम जगद्गुरु हुये। ये समन्वयवादी जगद्गुरु थे; जिन्होंने पूर्ववर्ती
समस्त आचार्यों जगद्गुरु श्री शंकराचार्य, जगद्गुरु श्री निम्बार्काचार्य,
जगद्गुरु श्री रामानुजाचार्य, जगद्गुरु श्री माध्वाचार्य एवं श्री चैतन्य
महाप्रभु के दार्शनिक सिद्धान्तों को सही सिद्ध करते हुये अपना
समन्वयवादी दार्शनिक सिद्धान्त प्रस्तुत किया। इनके मतानुसार यद्यपि
ईश्वर प्राप्ति के अनेक मार्ग हैं तथापि भक्ति ही सर्वश्रेष्ठ तथा सर्वसुलभ
मार्ग है, प्रत्येक जीव का लक्ष्य ‘स्वसुखवासना गन्ध लेश शून्य श्री
कृष्ण सुखैकतात्पर्यमयी सेवा’ ही है। इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु श्रवण,
