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ब्रज रस माधुरी

PART IV · Front matter · 20/20

प्रारम्भिक पृष्ठ

पुस्तक परिचय · About the book

15 source linesप्रारम्भिक पृष्ठPDF 34

पिछले आवरण का परिचय

वर्तमान काल में जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज विश्व के इतिहास में

पंचम जगद्गुरु हुये। ये समन्वयवादी जगद्गुरु थे; जिन्होंने पूर्ववर्ती

समस्त आचार्यों जगद्गुरु श्री शंकराचार्य, जगद्गुरु श्री निम्बार्काचार्य,

जगद्गुरु श्री रामानुजाचार्य, जगद्गुरु श्री माध्वाचार्य एवं श्री चैतन्य

महाप्रभु के दार्शनिक सिद्धान्तों को सही सिद्ध करते हुये अपना

समन्वयवादी दार्शनिक सिद्धान्त प्रस्तुत किया। इनके मतानुसार यद्यपि

ईश्वर प्राप्ति के अनेक मार्ग हैं तथापि भक्ति ही सर्वश्रेष्ठ तथा सर्वसुलभ

मार्ग है, प्रत्येक जीव का लक्ष्य ‘स्वसुखवासना गन्ध लेश शून्य श्री

कृष्ण सुखैकतात्पर्यमयी सेवा’ ही है। इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु श्रवण,

कीर्तन, स्मरण तीन प्रकार की प्रमुख भक्ति करनी होगी।

जगद्गुरु कृपालु परिषत्

www.jkpliterature.org

ISBN 938066155-X

9789380661551

Price : ₹ 50

ब्रज रस माधुरी · भाग ४020
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 4. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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