कीर्तन 1–16
कीर्तन 2 · Kirtan 2
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
सुमिरन कर ले मना, राधा अरु राधारमना।
सुमिरन कर ले मना, राधा अरु राधारमना।
दोई गोपीजन जीवना, राधा अरु राधारमना।
तीनों मम प्राणधना, गोपी राधा राधारमना।
ह्वै निष्काम मना, नित इनहिंन भजना।
गोपी भाव गुरु ही मना, शरण ग्रहण करना।
राग द्वेष जग में मना, पलहूँ न कभु करना।
साँचो मीत तेरे दो मना, राधा अरु राधारमना।
साँचो माता पिता हैं मना, राधा अरु राधारमना।
तेरे सब कुछ हैं मना, राधा अरु राधारमना।
भाव मधुर ही मना, राधा रमना में रखना।
बनि के अनन्य मना, राधारमना को भजना।
