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ब्रज रस माधुरी

PART IV · KIRTAN 6 · 9/20

कीर्तन 1–16

कीर्तन 6 · Kirtan 6

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

35 source linesपुस्तक पृष्ठ 16–17PDF 12

जय हो जय हो बरसाने वारी,

(सुमिरन कर ले मना . . .)

जय हो जय हो बरसाने वारी,

जय हो जय हो बनवारी।

मेरी ठकुरानी प्यारी,

ठाकुर बनवारी।

गलबँहियन वारी,

बलिहारी पिय प्यारी।

मेरो प्राण बनवारी,

बनवारी प्राण प्यारी।

प्यारी पर पिय वारी,

पिय पर वारी प्यारी।

आजा मेरे उर प्यारी,

उर॒ मिलें बनवारी।

प्यारी भजें बनवारी,

बनवारी भजें प्यारी।

मैं तो वारी वारी प्यारी,

वारी वारी बनवारी।

Source page 17

वारी प्यारी बनवारी,

वारी वारी ब्रजनारी।

प्यारी एतिक प्यारी,

लट्टू बनें बनवारी।

ब्रजरस तनु प्यारी,

चुवे पियें बनवारी।

दिव्य रस चुवे तनु प्यारी,

पियें छकि ब्रजनारी।

जब सजि बैठें प्यारी,

पंखा झलें बनवारी।

धनि धनि ब्रजनारी,

पिय प्यारी पर वारी।

धनि हम नर नारी,

पिय प्यारी पर वारी।

सब मिलि नर नारी,

बोलो जय हो जय हो प्यारी।

हैं ‘कृपालु’ बनवारी,

उनते भी आगे प्यारी।

ब्रज रस माधुरी · भाग ४009
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 4. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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