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निरंतर हरि-गुरु सेवा
Nirantar Hari-Guru seva
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सोचना ही साधना है गोविंद राधे।
बार बार सोचना ही हरि ते मिला दे॥ 4511॥
मेरा तू मेरा तू गोविंद राधे।
बार बार सोचना ही हरि ते मिला दे॥ 4512॥
गुरु ने बताया मोहिं गोविंद राधे।
उन्हीं का दिया है सब उन्हीं को लुटा दे॥ 2036॥
जब लौं मिलें ना हरि गोविंद राधे।
तब लौं करु गुरुसेवा बता दे॥ 2039॥
हरि की कृपा जो चह गोविंद राधे।
तन मन धन गुरुसेवा में लगा दे॥ 2048॥
तन मन धन धन्य गोविंद राधे।
जो हरि गुरु सेवा में लगा दे॥ 2049॥