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हरि साथी बने का है गोविंद राधे।
Hari saathi bane ka hai Govind Radhe
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हरि साथी बने का है गोविंद राधे।
गुरु साथी बिगरे का बिगरी बना दे॥ 1839॥
गुरु तो है माता सम गोविंद राधे।
शिशु मन मल धोके विमल बना दे॥ 1850॥
श्री गुरु चरणों में गोविंद राधे।
सिर को ही नहिं मन को भी झुका दे॥ 1886॥
गुरु जो प्रसन्न हो तो गोविंद राधे।
हरि हों प्रसन्न बिनु भक्ति बता दे॥ 1863॥
गुरु की कृपा बिनु गोविंद राधे।
कोटि साधन करो हरि कछु ना दे॥ 1862॥
गुरु की कृपा जो होवे गोविंद राधे।
भाजे आवें श्यामा श्याम गलबँहियाँ दे॥ 1844॥