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RADHEY RADHEY

होरी-माधुरी · पद 15

या कारे ने, करे करतब कारे।

पुस्तक का रोमन लिप्यन्तरण: yā kāre ne, kare karataba kāre

मूल पद के लेखक: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

मूल पद

1या कारे ने, करे करतब कारे।

2सुनु गोरी होरी खेलन मिस, हाय! करोर जुलुम ढारे।

3मलत गुलाल गाल कहि""प्यारी"", मोहूँ कह"तू कह प्यारे"।

4बरबस नैनन नैन मिलावत, पुनि तकि-तकि सैनन मारे।

5कहत लजात बात औरन सखि, करत न का, रे दैया रे।

6कह “कृपालु” तू तो अबला सखि! याते विधि, हरि, हर हारे॥

हिन्दी भावार्थ

होली के दिनों में श्यामसुन्दर के अटपट व्यवहारों से तंग आकर प्यार भरे कटाक्ष में एक सखी कहती है-' अरी सखी! इस काले कन्हैया की सब करतूतें भी काली हैं। अरी सखी! सुन, यह होली खेलने के बहाने करोड़ों जुल्म की बात करता है। '"प्यारी''कह कर गाल में गुलाल लगाता है और फिर मुझसे भी कहता है कि तू शर्माती क्यों है? मुझे 'प्यारे क्यों'नहीं कहती? अरी सखी! जबर्दस्ती झुककर आँख से आँख मिलाता है एवं अनेक प्रकार के अटपटे इशारे करता है। अरी सखी! और अन्तरंग बातों को बताने में लज्जा आती है संक्षेप में तू इतना समझ ले कि वह क्या नहीं करता।''इतने में ही 'कृपालु' ने कहा ''अरी सखि! तू तो लोकवेद में अबला मानी गई है, इससे तो महान् बलवान् ब्रह्मा, विष्णु, शंकर भी हार चुके हैं।

प्रकाशित पुस्तक से लिप्यंतरित पूरे पद का भावार्थ। स्रोत में पंक्ति-दर-पंक्ति या शब्द-दर-शब्द अर्थ नहीं दिया गया है।

भावार्थ स्रोत पृष्ठ: 693-694