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RADHEY RADHEY

युगल-माधुरी · पद 15

युगलवर, नैन नींद रहि छाय।

पुस्तक का रोमन लिप्यन्तरण: yugalavara, naina nīṁda rahi chhāya

मूल पद के लेखक: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

मूल पद

1युगलवर, नैन नींद रहि छाय।

2ललिता कह"चलि महल सोउ दोउ, सोवन-बेला आय"।

3मणिन-अलंकृत कनक पलँग भल, फूलन सेज सजाय।

4तापर किय छिरकाव सुगंधित, जो दोउन मन-भाय।

5पुनि तापर पौढ़े दोउ, सखियन, शयन आरती गाय।

6दोउ-उर धरि दोउ कर दोउ सोवत, लखि-लखि सखि हरषाय।

7करि संकेत “कृपालु” सखिन कह, सोवहु अब सब जाय॥

हिन्दी भावार्थ

युगल सरकार की आँखों में नींद भर गई है। ललिता कहती है, शयन का समय हो गया, अब दोनों महल में पधारें। मणि-मंडित स्वर्ण के पलंग पर सुगन्धित फूलों की शैय्या सजा दी गई है। उस शैय्या पर दोनों के मनपसंद इत्रादि का छिड़काव कर दिया गया है, उस पर युगल सरकार लेट गये हैं, सखियाँ शयन आरती गा रही हैं। दोनों एक-दूसरे के हृदय पर हाथ रख कर सो रहे हैं। यह झाँकी देखकर सखियाँ विभोर हैं। युगल सरकार को एकांत मिल जाय, इस आशय से "कृपालु हाथ से संकेत करते हुए सखियों से कहते हैं-अब सब लोग जाकर सो जाओ।

प्रकाशित पुस्तक से लिप्यंतरित पूरे पद का भावार्थ। स्रोत में पंक्ति-दर-पंक्ति या शब्द-दर-शब्द अर्थ नहीं दिया गया है।

भावार्थ स्रोत पृष्ठ: 493