# युगलवर, नैन नींद रहि छाय।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0514-M11-K015
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: युगल-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 15
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 239–239

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>युगलवर, नैन नींद रहि छाय।  
<a id="line-2"></a>ललिता कह"चलि महल सोउ दोउ, सोवन-बेला आय"।  
<a id="line-3"></a>मणिन-अलंकृत कनक पलँग भल, फूलन सेज सजाय।  
<a id="line-4"></a>तापर किय छिरकाव सुगंधित, जो दोउन मन-भाय।  
<a id="line-5"></a>पुनि तापर पौढ़े दोउ, सखियन, शयन आरती गाय।  
<a id="line-6"></a>दोउ-उर धरि दोउ कर दोउ सोवत, लखि-लखि सखि हरषाय।  
<a id="line-7"></a>करि संकेत “कृपालु” सखिन कह, सोवहु अब सब जाय॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

युगल सरकार की आँखों में नींद भर गई है। ललिता कहती है, शयन का समय हो गया, अब दोनों महल में पधारें। मणि-मंडित स्वर्ण के पलंग पर सुगन्धित फूलों की शैय्या सजा दी गई है। उस शैय्या पर दोनों के मनपसंद इत्रादि का छिड़काव कर दिया गया है, उस पर युगल सरकार लेट गये हैं, सखियाँ शयन आरती गा रही हैं। दोनों एक-दूसरे के हृदय पर हाथ रख कर सो रहे हैं। यह झाँकी देखकर सखियाँ विभोर हैं। युगल सरकार को एकांत मिल जाय, इस आशय से "कृपालु हाथ से संकेत करते हुए सखियों से कहते हैं-अब सब लोग जाकर सो जाओ।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 493

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
