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RADHEY RADHEY

होरी-माधुरी · पद 6

डारो डारो री, रंग बनवारी पै।

पुस्तक का रोमन लिप्यन्तरण: ḍāro ḍāro rī, raṅga banavārī pai

मूल पद के लेखक: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

मूल पद

1डारो डारो री, रंग बनवारी पै।

2लालहिं लाल गुलाल गाल मलु, मलु अबीर लटकारी पै।

3रंग बिरंग रंग पिचकारिन, डारो री गिरिधारी पै।

4छोरि लेउ याकी लकुटि कमरिया, लै चलु भानुदुलारी पै।

5सेहरा बाँधि बनाय दुल्हनियाँ, मिलि नचाउ अलि! तारी पै।

6बलिहारी “कृपालु” ब्रज नारिन, बलिहारी येहि यारी पै॥

हिन्दी भावार्थ

होली के अवसर पर एक सखी अन्य समस्त सखियों से कहती है कि चलो चलो सब लोग श्यामसुन्दर के ऊपर रंग डालो। लाल-लाल गुलाल उनके गालों में मल दो एवं अबीर उनके घुँघराले बालों में मल दो। अनेक रंग के रंग घोल कर पिचकारियों से उन्हें सराबोर कर दो। उनकी लठिया और कामरी छीन लो। एवं उन्हें पकड़कर श्री किशोरी जी के पास ले चलो। पुनः उनके सिंर सेहरा बाँधकर नवविवाहिता भा बनाकर, अपने हाथों की तालियों की ताल पर सब मिलकर नचाओ। 'कूपालु'कहते हैं कि मैं इन ब्रजांगनाओं पर तो बलिहार जाता हूँ परन्तु विशेष रूप से उनके प्रेम पर बलिहार जाता हूँ जिस प्रेम में बँधे हुए ब्रह्म की ऐसी दुर्दशा हो रही है।

प्रकाशित पुस्तक से लिप्यंतरित पूरे पद का भावार्थ। स्रोत में पंक्ति-दर-पंक्ति या शब्द-दर-शब्द अर्थ नहीं दिया गया है।

भावार्थ स्रोत पृष्ठ: 685-686