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RADHEY RADHEY

निकुंज-माधुरी · पद 5

आजु लखु, मंजु निकुंज-बहार।

पुस्तक का रोमन लिप्यन्तरण: āju lakhu, mañju nikuñja-bahāra

मूल पद के लेखक: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

मूल पद

1आजु लखु, मंजु निकुंज-बहार।

2झूलन की झाँकी अति बाँकी, धनि जिन दृगन निहार।

3किये श्याम सिंगार-गौर अरु, गौर श्याम-श्रृंगार।

4दोउ बैठे झूलन पाछे ते, लखि सखि करति विचार।

5कारन कौन आज जो बैठे, उलटे दोउ सरकार?।

6जब “कृपालु” देखी आगे ते, हँसि हँसि कह बलिहार॥

हिन्दी भावार्थ

अरी सखी! आज सुन्दर लता कुंज की बहार देख। युगल सरकार के झूलने की झाँकी क्या ही सुन्दर है। जिन आँखों ने देखा है वे धन्य हैं। आज श्री श्यामसुन्दर ने श्री किशोरी जी का शृंगार किया है एवं श्री किशोरी जी ने श्री श्यामसुन्दर का श्रृंगार किया है। दोनों को झूले में बैठे हुए पीछे से देखकर सखियाँ आश्चर्य में पड़ गयीं कि क्या कारण है कि आज युगल सरकार उलटे बैठे हैं। 'कृपालु' कहते हैं कि जब उन सखिंयों ने आगे देखा तब हँस-हँसकर बलिहारी है बलिहारी है, कहने लगीं।

प्रकाशित पुस्तक से लिप्यंतरित पूरे पद का भावार्थ। स्रोत में पंक्ति-दर-पंक्ति या शब्द-दर-शब्द अर्थ नहीं दिया गया है।

भावार्थ स्रोत पृष्ठ: 540