लीला-माधुरी · पद 24
होड़ है, आजु युगल सरकार।
पुस्तक का रोमन लिप्यन्तरण: hod̤a hai, āju yugala sarakāra
मूल पद के लेखक: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
मूल पद
1होड़ है, आजु युगल सरकार।
2दोउ कह, गावन हमरोइ नीको, हमरोइ स्वर-विस्तार।
3आई निर्णय हेतु विशाखा, सँग लै सखिन अपार।
4गौरी राग लगे गावन दोउ, मधुर सुरन बलिहार।
5कहीं विशाखा,"गावन दोउन, यद्यपि है इकसार।
6तदपि “कृपालु” ललिहिं कलकंठहि, अधिक मधुरता धार"॥
हिन्दी भावार्थ
आज श्यामा श्याम में गायन सम्बन्धी होड़ है। दोनों कह रहे हैं कि हमारा ही गाना सर्वश्रेष्ठ है एवं हमारा ही स्वर-विस्तार सर्वाधिक मधुर है। निर्णय के लिए सहस्रों सखियों को संग में लेकर विशाखा आई। उधर युगल सरकार अपनी-अपनी पूरी शक्ति लगाकर मधुर स्वरों के विस्तार के साथ गौरी राग गाने लगे। गायन समाप्त होने के पश्चात् विशाखा सखि ने निर्णय दिया कि यद्यपि दोनों का गायन एक समान ही है, फिर भी 'कृपालु' के शब्दों में किशोरी जी के कंठ की ध्वनि अधिक मधुर है।
प्रकाशित पुस्तक से लिप्यंतरित पूरे पद का भावार्थ। स्रोत में पंक्ति-दर-पंक्ति या शब्द-दर-शब्द अर्थ नहीं दिया गया है।
भावार्थ स्रोत पृष्ठ: 524