श्री राधा-बाल लीला-माधुरी · पद 13
माय री जोरी कौन बलाय।
पुस्तक का रोमन लिप्यन्तरण: māya rī, jorī kauna balāya
मूल पद के लेखक: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
मूल पद
1माय री जोरी कौन बलाय।
2लाल कौन जाकी जोरी हौं, वेगिहिं मोहिं बताय।
3पुनि पुनि अति झकझोरति पूछति, कीरति बलि बलि जाय।
4ओ लाली! ओ नंदगाम की, नौतनि मोहिं जनाय।
5नंदलाल ते तोरि सगाई, चाहति याते आय।
6तब “कृपालु” कह कुँवरि सगाई, काको कहियत माय॥
हिन्दी भावार्थ
छोटी सी किशोरी जी जोरी शब्द का अर्थ पूछती हुई मैया से कहती हैं-अरी मैया! जोरी कौन सी बलाय है? और वह 'लाल'कौन है जिसकी मैं जोरी हूँ? मुझे भी बता दे। इस प्रकार बार-बार पूछती हुई मैया को झकझोरती हैं। मैया भी वात्सल्य-प्रेम में विभोर हो रही हैं। मैया ने कहा-''अरी लाली! मुझे ऐसा लगता है कि जो युवतियाँ तुझको देखने आर्यी थीं, बे नन्दगाँव की थीं। उनके आने का कारण यह था कि वे चाहती हैं कि नन्दलाल के साथ तेरी सगाई हो जाय। कृपालु' के शब्दों में किशोरी जी ने कहा-''अरी मैया! सगाई किसको कहते हैं?
प्रकाशित पुस्तक से लिप्यंतरित पूरे पद का भावार्थ। स्रोत में पंक्ति-दर-पंक्ति या शब्द-दर-शब्द अर्थ नहीं दिया गया है।
भावार्थ स्रोत पृष्ठ: 379