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RADHEY RADHEY

श्री कृष्ण-बाल लीला-माधुरी · पद 42

मैया मै तो, बड़ी सी दुल्हनियाँ लैहौं।

पुस्तक का रोमन लिप्यन्तरण: maiyā maiṁ to, bad̤ī sī dulhaniyāṁ laihauṁ

मूल पद के लेखक: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

मूल पद

1मैया मै तो, बड़ी सी दुल्हनियाँ लैहौं।

2बनि दूलह सिर मौर बँधैहौं, सखन बरात सजैहौं।

3आजुहिं करि दे ब्याहु नाहिं तो, हौं नहिं माखन खैहौं।

4तेरी गोद न कबहुँ आइहौं, कठला गर न धरैहौं।

5जैहौं भाजि आजु ही घर सों, कबहुँ लौटि नहिं ऐहौं।

6यह ले अपनी लकुटि कमरिया, अब नहिं गाय चरैहौं।

7कहत “कृपालु” कान्ह जोगी बनि, घर घर अलख जगैहौं॥

हिन्दी भावार्थ

भोरे भारे श्यामसुन्दर ने अपनी मैया से कहा कि मैं तो बड़ी लम्बी सी (खजूर के समान) दुलहिनि लूँगा। दूल्हा बनकर अपने सिर पर मौर बँधाऊँगा एवं अपने सब सखाओं की बारात सजाऊँगा। मैया! आज ही मेरा विवाह कर दे नहीं तो मैं मक्खन नहीं खाऊँगा। तेरी गोद में भी कभी नहीं आऊँगा अपने गले में कठुला भी नहीं पहनूँगा एवं आज ही घर से भाग जाऊँगा, फिर लौट कर कभी नहीं आऊँगा। लठिया एवं कमरी मैया के आगे पटकते हुए कन्हैया ने कहा कि तेरी यह लठिया और कमरी यह रखी है, अब मैं तेरी गाय नहीं चराऊँगा। कृपालु' के मतानुसार कन्हैया कहते हैं कि यदि मैया तूने आज ही मेरा विवाह न कर दिया तो मैं योगी बन कर घर-घर अलख जगाऊँगा।

प्रकाशित पुस्तक से लिप्यंतरित पूरे पद का भावार्थ। स्रोत में पंक्ति-दर-पंक्ति या शब्द-दर-शब्द अर्थ नहीं दिया गया है।

भावार्थ स्रोत पृष्ठ: 304-305