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RADHEY RADHEY

श्री कृष्ण-बाल लीला-माधुरी · पद 43

मैया मोहिं, दै दे माखन रोटी।

पुस्तक का रोमन लिप्यन्तरण: maiyā mohiṁ, dai de mākhana roṭī

मूल पद के लेखक: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

मूल पद

1मैया मोहिं, दै दे माखन रोटी।

2पग पटकत झगरत झकझोरत, कर गहि यशुमति चोटी।

3"आँ, आँ, करत मथनियाँ पकरत, जात धरणि पर लोटी।

4लै निज गोद मातु दुलरावति, कहति"बात यह खोटी"।

5बिनु मुख धोये हौं नहिं दैहौं, नवनी रोटी मोटी।

6खाय “कृपालु” धोइहौं मुख कह, हरि पीतांबर ओटी॥

हिन्दी भावार्थ

छोटे से कन्हैया अपनी मैया से मक्खन रोटी माँग रहे हैं। अपना पैर पटकते जाते हैं एवं यशोदा मैया की चोरी को हाथ से पकड़ कर पीठ की ओर से झकझोरते हुए वात्सल्य प्रेमयुक्त झगड़ा कर रहे हैं। बाल स्वभावानुसार आँ आँ करते हुए मथानी पकड़ लेते हैं। इतने पर भी जब मैया नहीं सुनती तो मान करते हुए पृथ्वी पर लोर जाते हैं। यह देखकर मैया बालकृष्ण को अपनी गोद में लेकर दुलार करती हुई प्यार से शिक्षा देती है कि पृथ्वी पर लोटना बुरी बात है। फिर मैया कहती है पहले मुँह धो आओ तब मक्खन रोटी दूँगी। "कृपालु कहते हैं कि श्यामसुन्दर भोरेपन में पीताम्बर की ओट से मैया को यह उत्तर देते हैं कि प्रतिदिन की भाँति मक्खन रोटी खाकर मुँह धो लूँगा।

प्रकाशित पुस्तक से लिप्यंतरित पूरे पद का भावार्थ। स्रोत में पंक्ति-दर-पंक्ति या शब्द-दर-शब्द अर्थ नहीं दिया गया है।

भावार्थ स्रोत पृष्ठ: 305