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RADHEY RADHEY

श्री कृष्ण-बाल लीला-माधुरी · पद 40

मैया मेरो, रँग गोरो करि दे री।

पुस्तक का रोमन लिप्यन्तरण: maiyā mero, raṁga goro kari de rī

मूल पद के लेखक: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

मूल पद

1मैया मेरो, रँग गोरो करि दे री।

2सबै कहत मोहिं कारो कारो, सखन सखिन हँसि के री।

3भैया को गोरो मोहिं कारो, क्यों दुभाँति जनमे री।

4सुनु लाला! कह मैया, वह तो, रँग भगवान दिये री।

5वह भगवान रहत कहँ मैया! मारूँ मार घनेरी।

6बेगि बताउ “कृपालु” मातु न तु, गोद न अइहौं तेरी॥

हिन्दी भावार्थ

छोटे से भोले-भाले कन्हैया मैया से कहते हैं कि हे मैया! तू मेरे शरीर का रंग गोरा बना दे क्योंकि मुझे सभी सखियाँ एवं सभी सखा लोग 'कारो कारो', ऐसा कहकर हँसते हैं और मैया! यह बात भी ठीक है कि तूने भैया को गोरा और मुझे काला बनाकर पक्षपात किया है। मैया ने कहा—हे कन्हैया! शरीर का रंग आदि कोई माँ नहीं बनाती। वह तो भगवान् ही बनाते हैं। कन्हैया ने कहा कि मैया! वह भगवान् कहाँ रहता है जल्दी से बता, मैं उसकी भली-भाँति मरम्मत करूँगा। 'कृपालु' कहते हैं कि लाला ने मैया को यह धमकी दी कि मैया यदि तूने उस भगवान् का पता अभी ही नहीं बताया तो मैं तेरी गोद में कभी न आऊँगा।

प्रकाशित पुस्तक से लिप्यंतरित पूरे पद का भावार्थ। स्रोत में पंक्ति-दर-पंक्ति या शब्द-दर-शब्द अर्थ नहीं दिया गया है।

भावार्थ स्रोत पृष्ठ: 302-303