श्री कृष्ण-बाल लीला-माधुरी · पद 39
भोर भइ जागो सुंदर श्याम।
पुस्तक का रोमन लिप्यन्तरण: bhora bhai jāgo sundara shyāma
मूल पद के लेखक: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
मूल पद
1भोर भइ जागो सुंदर श्याम।
2झुकि झुकि झूमि झूमि मुख चूमति, मातु यशोमति भाम।
3लै लै नाम पुकार द्वार पर, मधुमंगल श्रीदाम।
4बछरन पियत नाहिं थन सुरभिन, परखत तोहिं सुखधाम।
5ऊँ, ऊँ, करत तानि पीतांबर, सो छवि अति अभिराम।
6सुनहु कान्ह करि कान जात हम, गोचारण, कह राम।
7सुनि “कृपालु” बल-वचन उठे हरि, अरबराइ धरि पाम॥
हिन्दी भावार्थ
सोते हुए श्यामसुन्दर को जगाती हुई मैया कहती सखा पुकार रहे हैं। देखो तो बछड़े गायों का दूध नहीं पी रहे हैं। तुम्हारी प्रतीक्षा में हैं।''श्यामसुन्दर एक भी नहीं सुनते। ऊँ-ऊँ करते हुए और भी पीताम्बर ओढ़ लेते हैं। यह झाँकी अनिर्वचनीय है। इतने में ही बलराम ने कहा, ''अरे कन्हैया कान खोलकर सुन ले, मैं तो गाय चराने जा रहा हूँ 'कृपालु के शब्दों में श्यामसुन्दर तुरन्त ही अड़बड़ाकर उठ खड़े हुए।
प्रकाशित पुस्तक से लिप्यंतरित पूरे पद का भावार्थ। स्रोत में पंक्ति-दर-पंक्ति या शब्द-दर-शब्द अर्थ नहीं दिया गया है।
भावार्थ स्रोत पृष्ठ: 301-302