श्री कृष्ण-बाल लीला-माधुरी · पद 24
हमारो कौन बनेगो लाल?।
पुस्तक का रोमन लिप्यन्तरण: hamāro kauna banego lāla?
मूल पद के लेखक: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
मूल पद
1हमारो कौन बनेगो लाल?।
2हमरी बात कौन मानेगो?"हौं"कह हरि ततकाल।
3कजरी गाय दूध को पीहैँ? यह सुनि भज्यो गुपाल।
4महरि पकरि कर बहु समुझावति, नहिं समुझत हठ-बाल।
5जो यह दूध पियत है वाकी, चोटी होति विशाल।
6बेगि बड़ो ह्वै जात, कान्ह सुनि, फँस्यो कीर ज्यों जाल।
7घूँटेक पियत लखत पुनि चोटिहिं, हँसत सकल मिलि ग्वाल।
8इमि धोखेहिं पय पिये लाल जब, चलीं यशोमति चाल।
9जो इक बार “कृपालु” कहे पिय, चोटी जाति पताल॥
हिन्दी भावार्थ
(मैया लाला को दूध पिलाने के लिए मधुर चाल चलती है। मैया कहती है-"हमारा लाला कौन बनेगा? है-'हमारी बात कौन मानेगा? बालकृष्ण ने कहा 'मैं'। कौन पीयेगा?'दूध का नाम सुनते ही बालकृष्ण चल दिये। मैया हाथ पकड़कर अनेक प्रकार से समझाती है, पर बालहठ के कारण वे किसी प्रकार दूध पीने को तैयार नहीं होते। मैया ने कहा- जो यह दूध पीता है उसकी चोरी बड़ी लम्बी हो जाती है।'तब भी श्रीकृष्ण तैयार नहीं हुए। मैया ने कहा- जो यह दूध पीता है वह शीघ्र ही बड़ा हो जाता है।'बड़ा होने की बात सुनते ही श्रीकृष्ण मैया के बगल में तोते की तरह फँसकर दूध पीने को तैयार हो गये, किन्तु जितने घूँट दूध पीते हैं, उतनी ही बार अपनी चोटी को अपने हाथ से टटोलते हैं। यह देखते हैं बढ़ी कि नहीं। समस्त ग्वाल-बाल एक साथ हँसने लगते हैं। की घूंट में चोरी बढ़ जायेगी, इस धोखे में जब सारा दूध बालकृष्ण पी गये तब मैया ने सोचा कि अब पुनः चोटी न बढ़ने के कारण यह दूध कैसे पियेगा? कहते हैं कि चाल चलते हुए मैया ने कहा- जो एक ही बार कहने से दूध पी लेता है उसकी चोटी पाताल तक बढ़ जाती है।
प्रकाशित पुस्तक से लिप्यंतरित पूरे पद का भावार्थ। स्रोत में पंक्ति-दर-पंक्ति या शब्द-दर-शब्द अर्थ नहीं दिया गया है।
भावार्थ स्रोत पृष्ठ: 286-287