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RADHEY RADHEY

सद्गुरु-माधुरी · पद 6

हमारो ऐसो है रखवार।

पुस्तक का रोमन लिप्यन्तरण: hamāro aiso hai rakhavāra

मूल पद के लेखक: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

मूल पद

1हमारो ऐसो है रखवार।

2जैसो है नहिं सकल विश्व महँ, कोउ समरथ सरकार।

3तीनि लोक अनुचर रह जिन को, विधि हरि हर करतार।

4सोउ अनुचर श्री महाविष्णु कहँ, जो कमला भरतार।

5सोउ श्री महाविष्णु अनुचर जिन, तिन कह नंदकुमार।

6सोउ “कृपालु” अनुचर जिन सोइ गुरु, कह भागवत पुकार॥

हिन्दी भावार्थ

हमारी रक्षा करने वाले ऐसे गुरुदेव हैं जैसा सम्पूर्ण विश्व में कोई समर्थ नहीं है। जरा सोचिये, तीनों लोकों के स्वामी ब्रह्मा, विष्णु, शंकर कहे जाते हैं, किन्तु वे तीनों भी महाविष्णु के दास हैं और फिर वे महाविष्णु भी श्याम के दास हैं। "कृपालु कहते हैं कि वे श्यामसुन्दर भी सद्गुरु के दास हैं। ऐसा उद्घोष भागवत पुराण का भी है।

प्रकाशित पुस्तक से लिप्यंतरित पूरे पद का भावार्थ। स्रोत में पंक्ति-दर-पंक्ति या शब्द-दर-शब्द अर्थ नहीं दिया गया है।

भावार्थ स्रोत पृष्ठ: 52