Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
तू नहिं मोरी मैया, मैया मैया मैया।
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1तू नहिं मोरी मैया, मैया मैया मैया।
2यशुमति सों अस कहत कन्हैया,
3अब न कहौं तोहिँ मैया, मैया मैया मैया।
4मोहिं किय कारो गोरो भैया,
5किय दुभाँति कत मैया, मैया मैया मैया।
6आपु कहत कारो मोहिं भैया,
7सखहुँ सिखावत मैया, मैया मैया मैया।
8सखन करत हाँसी सँग भैया,
9मोहिं रुवावत मैया, मैया मैया मैया।
10सब कह गोरो तेरो भैया,
11गोरो बाबा मैया, मैया मैया मैया।
12पायो परो कतहुँ कह भैया,
13मम उर संशय मैया, मैया मैया मैया।
14अबहूँ करि दे कारो भैया,
15मोहिं गोरो करु मैया, मैया मैया मैया।
16जनि रोवहु धरु धीर कन्हैया,
17““करि दूँगी,, कह मैया, मैया मैया मैया।
18उर “कृपालु” चिपटाय कन्हैया,
19तू मम सुत कह मैया, मैया मैया मैया।
20भावार्थ—श्रीकृष्ण माता यशोदा से कहते हैं-अरी मैया! तू
21मेरी मैया नहीं है। मैं अब तुझसे मैया कहकर नहीं बोलूँगा। तूने
22बलदाऊ भैया को तो गोरा बना दिया, मुझे काला बनाया यह दो
23प्रकार का व्यवहार तुमने क्यों किया? अरी मैया! दाऊ भैया स्वयं
24तो मुझे काला काला कहकर चिढ़ाते ही हैं साथ ही ग्वाल बालों
25को भी सिखा देते हैं। सारे सखा दाऊ भैया के साथ मिलकर मेरी
26हँसी उड़ाते हैं, मुझे रुलाते हैं। बालकृष्ण पुनः यशोदा से कहते हैं
27कि ग्वाल बाल मुझसे कहते हैं- तुम्हारे भैया बलदाऊ तो गोरे हैं
28नंद एवं यशोदा भी गौर वर्ण के हैं, तुम काले कैसे हो गये? दाऊ
29भैया मुझसे कहते हैं कि तुमको मैया ने जन्म नहीं दिया है कहीं
30पड़ा पाया है। दाऊ भैया की बात सुनकर मुझे भी संदेह हो जाता
31है कि कदाचित् दाऊ भैया ही सत्य कहते हैं। मैं तुम्हारा पुत्र नहीं
32हूँ। पुनः बालकृष्ण अपनी माता से हठ करते हैं- मैया! तुम दाऊ
33भैया को अभी-ही काला और मुझे गोरा बना दो। वात्सल्यमयी
34यशोदा ने अपने लाड़ले की भोली बातें सुनीं और कहने लगीं-
35मेरे कान्हा! धैर्य धारण करो। रोओ मत। मैं अभी ही दाऊ को
36काला और तुम्हें गोरा बना दूँगी। श्री कृपालुजी कहते हैं- यशोदा
37ने कृष्ण को हृदय से लगा लिया और उन्हें सान्त्वना देने लगीं।
38यशोदा कहती हैं- हे कन्हैया! तू ही मेरा पुत्र है।