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Yugal Shatak

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

कारे करतब तव कारे, कारे कारे कारे।

Reading 37 of 112 · Source no. 25 · Source PDF 64–66

1कारे करतब तव कारे, कारे कारे कारे।

2काउ के हैं तन कारे काउ के हैं मन कारे,

3तेरे तन मन दोउ कारे, कारे कारे कारे।

4तू तो अभी सात बरस को है कारे,

5का रे करे बड़ो हो के कारे, कारे कारे कारे।

6तुने जनमत ही जुलुम ढारे कारे,

7तजि माता पिता भजे कारे, कारे कारे कारे।

8ठगे पुनि नंद यशोमति कारे,

9बनि गये तिन सुत कारे, कारे कारे कारे।

10छठी के दिनहिं तूने पूतना मारे,

11पुनि तिन दीनी गति कारे, कारे कारे कारे।

12सखन सतावत दिन महँ कारे,

13रात सखिन कहँ कारे, कारे कारे कारे।

14मात पिता बंदी गृह कारे,

15भोगत रह दुख कारे, कारे कारे कारे।

16तू रह रास करत इत कारे,

17धनि तो सम सुत कारे, कारे कारे कारे।

18दुर्वासाहूँ कह तोहिं कारे,

19हैं “कृपालु” हरि कारे, कारे कारे कारे।

20भावार्थ—किसी सखी ने अत्यन्त रसिकता की शैली में श्रीकृष्ण

21से कहा-हे कृष्ण! तुम्हारी करतूत अत्यन्त काली है। किसी का

22शरीर काला होता है, किसी का मन। तुम्हारे तो तन और मन दोनों

23ही काले हैं। अरे कृष्ण! अभी तो तुम सात वर्ष के ही हो जब अभी

24से तुम्हारा यह हाल है तो तुम बड़े होकर क्या-क्या नहीं करोगे?

25तुमने जन्म लेते ही अपने माता-पिता (वसुदेव, देवकी) के साथ

26अत्यन्त कपटपूर्ण व्यवहार किया। तुम अपने माता-पिता को त्याग

27कर जेल से भागकर गोकुल पहुँच गये। गोकुल में जाकर नंद और

28यशोदा के साथ भी छल किया। पुत्र तो तुम वसुदेव और देवकी के

29थे परन्तु भोली यशोदा ने तुम्हें अपने उदर से उत्पन्न हुआ जानकर

30अत्यन्त लाड़ से तुम्हारा पालन-पोषण किया। वृद्धावस्था में पुत्र

31हुआ, जानकर बेचारे नंद भी आनन्द मनाने लगे। जन्म के छठे दिन

32ही तुमने पूतना राक्षसी को मृत्यु के घाट उतार दिया एवं उसको

33सदा के लिये जन्म-मृत्यु से मुक्त कर दिया। दिन में गोचारण के

34समय सखाओं को तंग करते हो। किसी से खेल में हारकर उसका

35दाँव नहीं देते। किसी से अपनी गायें हँकवाते हो। किसी का कलेवा

36छीनकर दूसरों को बाँट देते हो। रात्रि में मुरली बजाकर गृह-कार्य

37में संलग्न ब्रज-ललनाओं के चित्त चुराकर उन्हें वन-वन भटकाते

38हो। तुम्हारे माता-पिता (वसुदेव, देवकी) ग्यारह वर्ष तक कंस के

39कारागार में भयानक कष्ट भोगते रहे और तुम ब्रज में रास रचाते

40रहे। संसार में भी ऐसा कोई पुत्र नहीं होगा जो माता-पिता को

41दुःख में पड़ा देखकर भी चिरकाल तक उनकी कोई चिन्ता न

42करे। तुम्हारे गुरु दुर्वासा तो तुम्हें कृपालु ही घोषित करते हैं।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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