# कारे करतब तव कारे, कारे कारे कारे।

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

Source ID: native-yugal-shatak-2005:yugal-shatak-2005-kirtan-025
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Book: Yugal Shatak
Source edition: 17-hi-2005; SHA-256 65e97712a464ad9a811875abe92d7ad166ef58f82c9b675cf4d010c1c940a7f7
Source PDF pages: 64–66



<a id="line-1"></a>कारे करतब तव कारे, कारे कारे कारे।  
<a id="line-2"></a>काउ के हैं तन कारे काउ के हैं मन कारे,  
<a id="line-3"></a>तेरे तन मन दोउ कारे, कारे कारे कारे।  
<a id="line-4"></a>तू तो अभी सात बरस को है कारे,  
<a id="line-5"></a>का रे करे बड़ो हो के कारे, कारे कारे कारे।  
<a id="line-6"></a>तुने जनमत ही जुलुम ढारे कारे,  
<a id="line-7"></a>तजि माता पिता भजे कारे, कारे कारे कारे।  
<a id="line-8"></a>ठगे पुनि नंद यशोमति कारे,  
<a id="line-9"></a>बनि गये तिन सुत कारे, कारे कारे कारे।  
<a id="line-10"></a>छठी के दिनहिं तूने पूतना मारे,  
<a id="line-11"></a>पुनि तिन दीनी गति कारे, कारे कारे कारे।  
<a id="line-12"></a>सखन सतावत दिन महँ कारे,  
<a id="line-13"></a>रात सखिन कहँ कारे, कारे कारे कारे।  
<a id="line-14"></a>मात पिता बंदी गृह कारे,  
<a id="line-15"></a>भोगत रह दुख कारे, कारे कारे कारे।  
<a id="line-16"></a>तू रह रास करत इत कारे,

<a id="line-17"></a>धनि तो सम सुत कारे, कारे कारे कारे।  
<a id="line-18"></a>दुर्वासाहूँ कह तोहिं कारे,  
<a id="line-19"></a>हैं “कृपालु” हरि कारे, कारे कारे कारे।

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-20"></a>भावार्थ—किसी सखी ने अत्यन्त रसिकता की शैली में श्रीकृष्ण  
<a id="line-21"></a>से कहा-हे कृष्ण! तुम्हारी करतूत अत्यन्त काली है। किसी का  
<a id="line-22"></a>शरीर काला होता है, किसी का मन। तुम्हारे तो तन और मन दोनों  
<a id="line-23"></a>ही काले हैं। अरे कृष्ण! अभी तो तुम सात वर्ष के ही हो जब अभी  
<a id="line-24"></a>से तुम्हारा यह हाल है तो तुम बड़े होकर क्या-क्या नहीं करोगे?  
<a id="line-25"></a>तुमने जन्म लेते ही अपने माता-पिता (वसुदेव, देवकी) के साथ  
<a id="line-26"></a>अत्यन्त कपटपूर्ण व्यवहार किया। तुम अपने माता-पिता को त्याग  
<a id="line-27"></a>कर जेल से भागकर गोकुल पहुँच गये। गोकुल में जाकर नंद और  
<a id="line-28"></a>यशोदा के साथ भी छल किया। पुत्र तो तुम वसुदेव और देवकी के  
<a id="line-29"></a>थे परन्तु भोली यशोदा ने तुम्हें अपने उदर से उत्पन्न हुआ जानकर  
<a id="line-30"></a>अत्यन्त लाड़ से तुम्हारा पालन-पोषण किया। वृद्धावस्था में पुत्र  
<a id="line-31"></a>हुआ, जानकर बेचारे नंद भी आनन्द मनाने लगे। जन्म के छठे दिन  
<a id="line-32"></a>ही तुमने पूतना राक्षसी को मृत्यु के घाट उतार दिया एवं उसको  
<a id="line-33"></a>सदा के लिये जन्म-मृत्यु से मुक्त कर दिया। दिन में गोचारण के  
<a id="line-34"></a>समय सखाओं को तंग करते हो। किसी से खेल में हारकर उसका  
<a id="line-35"></a>दाँव नहीं देते। किसी से अपनी गायें हँकवाते हो। किसी का कलेवा  
<a id="line-36"></a>छीनकर दूसरों को बाँट देते हो। रात्रि में मुरली बजाकर गृह-कार्य  
<a id="line-37"></a>में संलग्न ब्रज-ललनाओं के चित्त चुराकर उन्हें वन-वन भटकाते  
<a id="line-38"></a>हो। तुम्हारे माता-पिता (वसुदेव, देवकी) ग्यारह वर्ष तक कंस के  
<a id="line-39"></a>कारागार में भयानक कष्ट भोगते रहे और तुम ब्रज में रास रचाते

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-40"></a>रहे। संसार में भी ऐसा कोई पुत्र नहीं होगा जो माता-पिता को  
<a id="line-41"></a>दुःख में पड़ा देखकर भी चिरकाल तक उनकी कोई चिन्ता न  
<a id="line-42"></a>करे। तुम्हारे गुरु दुर्वासा तो तुम्हें कृपालु ही घोषित करते हैं।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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Unofficial source transcription. Roman transliteration is not an English translation. No missing meanings are generated.
