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Yugal Shatak

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

कान्हा ने जुलुम ढाये मैया, मैया मैया मैया।

Reading 36 of 112 · Source no. 24 · Source PDF 62–64

1कान्हा ने जुलुम ढाये मैया, मैया मैया मैया।

2सखिन सतावत नित प्रति मैया,

3तू कह भोरो मैया, मैया मैया मैया।

4तोरत लर फोरत घट मैया,

5फारत चूनरि मैया, मैया मैया मैया।

6कबहुँ दिखाव अँगूठा मैया,

7कबहुँ मार दृग मैया, मैया मैया मैया।

8कबहुँ कहत मोहिं “प्यारी” मैया,

9कबहुँक “भाभी” मैया, मैया मैया मैया।

10कबहुँ ब्याहु करु मोते मैया,

11इमि कहि लिपटत मैया, मैया मैया मैया।

12जो हौं कहौं “कहौं जा मैया,

13तो कह “जा कहु मैया, मैया मैया मैया।

14चोरी करत फिरत नित मैया,

15दधि माखन चित मैया, मैया मैया मैया।

16तू छोटो सो मानत मैया,

17बड़ो होत द्रुत मैया, मैया मैया मैया।

18कबहुँ पकरि पावूँ जब मैया,

19बनि जाय मम पति मैया, मैया मैया मैया।

20यह “कृपालु” मायावी मैया,

21मायापति है मैया, मैया मैया मैया॥

22भावार्थ—किसी ब्रजगोपी ने बालकृष्ण की चंचलता से खीझकर

23यशोदा मैया से कहा-अरी यशोदा मैया! तुम्हारे कन्हैया ने तो सारे

24ब्रज को सिर पर उठा रखा है! नित्य ही तुम्हारा लाला ब्रजगोपियों

25को छेड़ता रहता है। परन्तु तुम तो उसे अत्यन्त भोला-भाला ही

26समझती हो। अरी मैया! वह हम सबके गले की माला को तोड़

27देता है। जब हम सब सखियाँ जल भरने के लिये यमुना तट पर

28जाती हैं, तब हमारे घड़े फोड़ देता है। हमारी सिर की चुनरी भी

29वह फाड़ देता है। हे यशोदे! तुम अपने पुत्र की करतूतों को नहीं

30जानती हो। कभी तो वह हम सबको अँगूठा दिखाता है, कभी नेत्रों

31से कटाक्षपात करता है। कभी “प्यारी” कहकर तो कभी भाभी कहकर

32सखियों से हास-परिहास करता है। तुम्हारा लाला देखने में ही

33छोटा प्रतीत होता है, बातें तो बड़ों की सी करता है। कभी तो

34कहता है कि मेरे साथ अपना विवाह कर लो ऐसा कहकर अत्यन्त

35रसपूर्ण ढंग से मुझसे लिपट जाता है। यदि मैं उसे भयभीत करने के

36लिये कहती हूँ कि अभी तुम्हारी मैया से शिकायत करने जा रही हूँ

37तो निःशंक होकर कहता है-जा जा मैया से कह दे। हे यशोदे! यह

38कृष्ण हमारे घर के दही, माखन तो चुराता ही है हमारे चित्त की भी

39चोरी करता है। तुम तो अपने पुत्र को छोटा सा बालक ही समझती

40हो परन्तु यह अत्यन्त शीघ्रता से बड़ा हो जाता है। यदि इसे पकड़कर

41तुम्हारे पास लाने का विचार करती हूँ तो यह मेरे पति का रूप

42धारण कर लेता है। यशोदे! तुम्हारा यह नन्हा सा लाल अत्यन्त

43मायावी है। यह “कृपालु” मायापति होने के कारण अपनी माया से

44बड़ों-बड़ों को भी नचाता रहता है।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

Source edition and PDF · Text version