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Yugal Shatak

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

Reading 35 of 112 · Source no. 23 · Source PDF 56–62

1मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

2अपना बना ले मोहिं मेरे नँदनन्दन।

3मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

4दरस दिखा दे टुक मेरे नँदनन्दन।

5मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

6प्रेम सुधा दे टुक मेरे नँदनन्दन।

7मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

8निज सेवा दे मोहिं मेरे नँदनन्दन।

9मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

10जन सेवा दे मोहिं मेरे नँदनन्दन।

11मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

12तू ही मेरा मैं भी तेरा मेरे नँदनन्दन।

13मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

14भूलो जनि कभु मोहिं मेरे नँदनन्दन।

15मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

16मैं ना भूलूँ कभु तोहिं मेरे नँदनन्दन।

17मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

18मेरे थे हो रहोगे भी मेरे नँदनन्दन।

19मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

20पाछा नहिं छोड़ूँ तेरा मेरे नँदनन्दन।

21मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

22लागी नहिं छूटे अब मेरे नँदनन्दन।

23मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

24जग छूटे तू ना छूटे मेरे नँदनन्दन।

25मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

26उर ते जो जा तो जानूँ मेरे नँदनन्दन।

27मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

28मैं हूँ तेरा तू ही मेरा मेरे नँदनन्दन।

29मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

30उर ते लगा ले मोहिं मेरे नँदनन्दन।

31मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

32प्यारी कहि के बुला ले मेरे नँदनन्दन।

33मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

34जित देखुँ तित तोहिं मेरे नँदनन्दन।

35मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

36रिद्धि सिद्धि माँगूं नहिं मेरे नँदनन्दन।

37मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

38सातों स्वर्ग माँगूं नहिं मेरे नँदनन्दन।

39मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

40पाँचों मुक्ति माँगूं नहिं मेरे नँदनन्दन।

41मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

42शिशु क्रन्दन माँगूं मेरे नँदनन्दन।

43मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

44अष्टयामी सेवा माँगूं मेरे नँदनन्दन।

45मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

46तव रुचि मेरी रुचि मेरे नँदनन्दन।

47मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

48तोपै वारी-वारी जाऊँ मेरे नँदनन्दन।

49मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

50हरि हर मोहन मेरे नँदनन्दन।

51मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

52उमा रमा मोहन मेरे नँदनन्दन।

53मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

54मुक्त जन मोहन मेरे नँदनन्दन।

55मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

56तू ही माता पिता भ्राता मेरे नँदनन्दन।

57मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

58स्वामी सखा सुत पिय मेरे नँदनन्दन।

59मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

60तोपै तन-मन वारुँ मेरे नँदनन्दन।

61मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

62करुँ कोटि वंदन मेरे नँदनन्दन।

63मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

64भलो बुरो जो हूँ तेरो मेरे नँदनन्दन।

65मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

66तेरो है भरोसो भारी मेरे नँदनन्दन।

67मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

68दीन मैं तू दीनबन्धु मेरे नँदनन्दन।

69मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

70तू पतित-पावन मेरे नँदनन्दन।

71मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

72तेरे अगनित तू ही मेरे नँदनन्दन।

73मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

74बिगरी बना दे मेरी मेरे नँदनन्दन।

75मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

76सत चित सुख घन मेरे नँदनन्दन।

77मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

78मदनहुँ मोहन मेरे नँदनन्दन।

79मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

80निज मन मोहन मेरे नँदनन्दन।

81मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

82त्रिभुवन मोहन मेरे नँदनन्दन।

83मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

84मोहिनि मोहन मेरे नँदनन्दन।

85मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

86शिव शुक मोहन मेरे नँदनन्दन।

87मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

88तुझ सा “कृपालु” नहिं मेरे नँदनन्दन।

89भावार्थ—हे मेरे नन्दनन्दन! तुम मुझे सदा-सदा के लिये अपना

90बना लो। एक बार कृपा करके अपनी मनोहर झाँकी का दर्शन मुझे

91भी करा दो। तुम तो प्रेमामृत के सागर हो। किंचित् प्रेम-कण मुझे

92भी प्रदान करो। तुम मुझे अपनी सेवा का सौभाग्य कब प्रदान

93करोगे? यदि अपनी सेवा न दे सको तो अपने प्रेमी-जनों की सेवा

94का सौभाग्य ही मुझे दे दो। हे नन्दकुमार! मेरे तो एकमात्र तुम्हीं

95हो, मैं भी तो एकमात्र तुम्हारा ही हूँ। कृपा करके तुम मेरा विस्मरण

96न करना। मैं भी कभी तुम्हें न भुलाऊँ। तुम सदा से मेरे थे। वर्तमान

97में भी एकमात्र तुम ही मेरे हो तथा भविष्य में भी केवल तुम ही

98मेरे रहोगे। मैं तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ूँगा। अब जो लगन तुमसे

99लग चुकी है उसका छुटाना कठिन है। भले ही सम्पूर्ण विश्व मेरा

100त्याग कर दे परन्तु मैं तुम्हें नहीं छोड़ूँगा। हे श्यामसुन्दर! यदि तुम

101मुझसे दूर भागना चाहते हो तो तनिक मेरे हृदय से निकलकर

102दिखाओ। मैं तुम्हारा हूँ, तुम भी मेरे बनकर दिखा दो। एक बार

103मुझे अपने हृदय से लगाकर “प्यारी” कहकर मुझे बुला लो। ऐसा

104कब होगा जब मैं जिधर दृष्टि डालूँ उधर तुम ही तुम दिखाई दो?

105हे मेरे प्रभु! मैं तुमसे कभी ऋद्धियोँ, सिद्धियोँ की याचना नहीं

106करता। मैं तुमसे सातों प्रकार के स्वर्ग भी नहीं चाहता। पाँचों प्रकार

107की मुक्तियाँ भी मुझे नहीं चाहिये। मैं भोले-भाले नवजात शिशु की

108भाँति रो-रोकर सदा तुम्हें पुकारता रहूँ। अष्टयामी सेवा मुझे प्रदान

109करो। मैं सदा तुम्हारी रुचि में ही रुचि रखूँ। अपना तन, मन, प्राण

110सदा तुम पर न्यौछावर करता रहूँ। हे मेरे नन्दलाल! तुम्हारा रूप तो

111ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव को भी मोहित कर देने वाला है। तुम उमा,

112रमा के भी मन को मोहित करने वाले हो। संसार बन्धन से जो

113मुक्त जन हैं उनके भी मन को तुमने लुभाया है। हे प्रभु! अब तो

114तुम ही मेरे माता, पिता एवं भाई बन्धु हो। तुम ही मेरे स्वामी,

115सखा, पुत्र एवं प्रियतम हो। मैं अपना तन, मन, धन तुम पर न्यौछावर

116करता हूँ। मैं करोड़ों बार तुम्हारा वन्दन करता हूँ। मैं अच्छा हूँ तो,

117बुरा हूँ तो, तुम्हारा ही तो हूँ। मुझे तुम्हारा ही भरोसा है। हे दीनों के

118एकमात्र बंधु! मैं तो अत्यन्त ही दीन हीन हूँ। तुम पतितों को पावन

119करने वाले हो। तुम्हारे तो असंख्य प्रिय भक्त हैं किन्तु मेरे तो एकमात्र

120तुम ही हो। मेरी बिगड़ी को तुम ही बनाने वाले हो। हे नंदनंदन!

121तुम सत्, चित्, आनंदघन स्वरूप हो। कामदेव को भी मोहित करने

122वाले तुम हो। अपने रूप लावण्य पर तुम स्वयं भी मुग्ध हो जाते

123हो। त्रिभुवन के समस्त चराचर प्राणी तुम्हारे रूप पर मोहित हो

124जाते हैं। तुम मनमोहिनी राधा के चित्त को भी चुराते हो। सनक

125आदि के मन को भी तुमने अपनी चरण-गंध से मधुकर बना लिया।

126अनन्त गुण गण से विभूषित होते हुए भी तुम अत्यन्त कृपालु हो।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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