# मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

Source ID: native-yugal-shatak-2005:yugal-shatak-2005-kirtan-023
Canonical page: https://radhey.shreyam1008.com.np/read/yugal-shatak-2005/yugal-shatak-2005-kirtan-023/
Book: Yugal Shatak
Source edition: 17-hi-2005; SHA-256 65e97712a464ad9a811875abe92d7ad166ef58f82c9b675cf4d010c1c940a7f7
Source PDF pages: 56–62



<a id="line-1"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-2"></a>अपना बना ले मोहिं मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-3"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-4"></a>दरस दिखा दे टुक मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-5"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-6"></a>प्रेम सुधा दे टुक मेरे नँदनन्दन।

<a id="line-7"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-8"></a>निज सेवा दे मोहिं मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-9"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-10"></a>जन सेवा दे मोहिं मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-11"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-12"></a>तू ही मेरा मैं भी तेरा मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-13"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-14"></a>भूलो जनि कभु मोहिं मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-15"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-16"></a>मैं ना भूलूँ कभु तोहिं मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-17"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-18"></a>मेरे थे हो रहोगे भी मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-19"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-20"></a>पाछा नहिं छोड़ूँ तेरा मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-21"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-22"></a>लागी नहिं छूटे अब मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-23"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-24"></a>जग छूटे तू ना छूटे मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-25"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-26"></a>उर ते जो जा तो जानूँ मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-27"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-28"></a>मैं हूँ तेरा तू ही मेरा मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-29"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

<a id="line-30"></a>उर ते लगा ले मोहिं मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-31"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-32"></a>प्यारी कहि के बुला ले मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-33"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-34"></a>जित देखुँ तित तोहिं मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-35"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-36"></a>रिद्धि सिद्धि माँगूं नहिं मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-37"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-38"></a>सातों स्वर्ग माँगूं नहिं मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-39"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-40"></a>पाँचों मुक्ति माँगूं नहिं मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-41"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-42"></a>शिशु क्रन्दन माँगूं मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-43"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-44"></a>अष्टयामी सेवा माँगूं मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-45"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-46"></a>तव रुचि मेरी रुचि मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-47"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-48"></a>तोपै वारी-वारी जाऊँ मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-49"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-50"></a>हरि हर मोहन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-51"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-52"></a>उमा रमा मोहन मेरे नँदनन्दन।

<a id="line-53"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-54"></a>मुक्त जन मोहन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-55"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-56"></a>तू ही माता पिता भ्राता मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-57"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-58"></a>स्वामी सखा सुत पिय मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-59"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-60"></a>तोपै तन-मन वारुँ मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-61"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-62"></a>करुँ कोटि वंदन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-63"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-64"></a>भलो बुरो जो हूँ तेरो मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-65"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-66"></a>तेरो है भरोसो भारी मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-67"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-68"></a>दीन मैं तू दीनबन्धु मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-69"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-70"></a>तू पतित-पावन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-71"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-72"></a>तेरे अगनित तू ही मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-73"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-74"></a>बिगरी बना दे मेरी मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-75"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।

<a id="line-76"></a>सत चित सुख घन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-77"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-78"></a>मदनहुँ मोहन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-79"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-80"></a>निज मन मोहन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-81"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-82"></a>त्रिभुवन मोहन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-83"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-84"></a>मोहिनि मोहन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-85"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-86"></a>शिव शुक मोहन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-87"></a>मेरे नँदनन्दन मेरे नँदनन्दन।  
<a id="line-88"></a>तुझ सा “कृपालु” नहिं मेरे नँदनन्दन।

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-89"></a>भावार्थ—हे मेरे नन्दनन्दन! तुम मुझे सदा-सदा के लिये अपना  
<a id="line-90"></a>बना लो। एक बार कृपा करके अपनी मनोहर झाँकी का दर्शन मुझे  
<a id="line-91"></a>भी करा दो। तुम तो प्रेमामृत के सागर हो। किंचित् प्रेम-कण मुझे  
<a id="line-92"></a>भी प्रदान करो। तुम मुझे अपनी सेवा का सौभाग्य कब प्रदान  
<a id="line-93"></a>करोगे? यदि अपनी सेवा न दे सको तो अपने प्रेमी-जनों की सेवा  
<a id="line-94"></a>का सौभाग्य ही मुझे दे दो। हे नन्दकुमार! मेरे तो एकमात्र तुम्हीं  
<a id="line-95"></a>हो, मैं भी तो एकमात्र तुम्हारा ही हूँ। कृपा करके तुम मेरा विस्मरण  
<a id="line-96"></a>न करना। मैं भी कभी तुम्हें न भुलाऊँ। तुम सदा से मेरे थे। वर्तमान  
<a id="line-97"></a>में भी एकमात्र तुम ही मेरे हो तथा भविष्य में भी केवल तुम ही  
<a id="line-98"></a>मेरे रहोगे। मैं तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ूँगा। अब जो लगन तुमसे

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-99"></a>लग चुकी है उसका छुटाना कठिन है। भले ही सम्पूर्ण विश्व मेरा  
<a id="line-100"></a>त्याग कर दे परन्तु मैं तुम्हें नहीं छोड़ूँगा। हे श्यामसुन्दर! यदि तुम  
<a id="line-101"></a>मुझसे दूर भागना चाहते हो तो तनिक मेरे हृदय से निकलकर  
<a id="line-102"></a>दिखाओ। मैं तुम्हारा हूँ, तुम भी मेरे बनकर दिखा दो। एक बार  
<a id="line-103"></a>मुझे अपने हृदय से लगाकर “प्यारी” कहकर मुझे बुला लो। ऐसा  
<a id="line-104"></a>कब होगा जब मैं जिधर दृष्टि डालूँ उधर तुम ही तुम दिखाई दो?  
<a id="line-105"></a>हे मेरे प्रभु! मैं तुमसे कभी ऋद्धियोँ, सिद्धियोँ की याचना नहीं  
<a id="line-106"></a>करता। मैं तुमसे सातों प्रकार के स्वर्ग भी नहीं चाहता। पाँचों प्रकार  
<a id="line-107"></a>की मुक्तियाँ भी मुझे नहीं चाहिये। मैं भोले-भाले नवजात शिशु की  
<a id="line-108"></a>भाँति रो-रोकर सदा तुम्हें पुकारता रहूँ। अष्टयामी सेवा मुझे प्रदान  
<a id="line-109"></a>करो। मैं सदा तुम्हारी रुचि में ही रुचि रखूँ। अपना तन, मन, प्राण  
<a id="line-110"></a>सदा तुम पर न्यौछावर करता रहूँ। हे मेरे नन्दलाल! तुम्हारा रूप तो  
<a id="line-111"></a>ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव को भी मोहित कर देने वाला है। तुम उमा,  
<a id="line-112"></a>रमा के भी मन को मोहित करने वाले हो। संसार बन्धन से जो  
<a id="line-113"></a>मुक्त जन हैं उनके भी मन को तुमने लुभाया है। हे प्रभु! अब तो  
<a id="line-114"></a>तुम ही मेरे माता, पिता एवं भाई बन्धु हो। तुम ही मेरे स्वामी,  
<a id="line-115"></a>सखा, पुत्र एवं प्रियतम हो। मैं अपना तन, मन, धन तुम पर न्यौछावर  
<a id="line-116"></a>करता हूँ। मैं करोड़ों बार तुम्हारा वन्दन करता हूँ। मैं अच्छा हूँ तो,  
<a id="line-117"></a>बुरा हूँ तो, तुम्हारा ही तो हूँ। मुझे तुम्हारा ही भरोसा है। हे दीनों के  
<a id="line-118"></a>एकमात्र बंधु! मैं तो अत्यन्त ही दीन हीन हूँ। तुम पतितों को पावन  
<a id="line-119"></a>करने वाले हो। तुम्हारे तो असंख्य प्रिय भक्त हैं किन्तु मेरे तो एकमात्र  
<a id="line-120"></a>तुम ही हो। मेरी बिगड़ी को तुम ही बनाने वाले हो। हे नंदनंदन!  
<a id="line-121"></a>तुम सत्, चित्, आनंदघन स्वरूप हो। कामदेव को भी मोहित करने

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-122"></a>वाले तुम हो। अपने रूप लावण्य पर तुम स्वयं भी मुग्ध हो जाते  
<a id="line-123"></a>हो। त्रिभुवन के समस्त चराचर प्राणी तुम्हारे रूप पर मोहित हो  
<a id="line-124"></a>जाते हैं। तुम मनमोहिनी राधा के चित्त को भी चुराते हो। सनक  
<a id="line-125"></a>आदि के मन को भी तुमने अपनी चरण-गंध से मधुकर बना लिया।  
<a id="line-126"></a>अनन्त गुण गण से विभूषित होते हुए भी तुम अत्यन्त कृपालु हो।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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