# कान्हा ने जुलुम ढाये मैया, मैया मैया मैया।

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

Source ID: native-yugal-shatak-2005:yugal-shatak-2005-kirtan-024
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Book: Yugal Shatak
Source edition: 17-hi-2005; SHA-256 65e97712a464ad9a811875abe92d7ad166ef58f82c9b675cf4d010c1c940a7f7
Source PDF pages: 62–64



<a id="line-1"></a>कान्हा ने जुलुम ढाये मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-2"></a>सखिन सतावत नित प्रति मैया,  
<a id="line-3"></a>तू कह भोरो मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-4"></a>तोरत लर फोरत घट मैया,  
<a id="line-5"></a>फारत चूनरि मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-6"></a>कबहुँ दिखाव अँगूठा मैया,  
<a id="line-7"></a>कबहुँ मार दृग मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-8"></a>कबहुँ कहत मोहिं “प्यारी” मैया,  
<a id="line-9"></a>कबहुँक “भाभी” मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-10"></a>कबहुँ ब्याहु करु मोते मैया,  
<a id="line-11"></a>इमि कहि लिपटत मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-12"></a>जो हौं कहौं “कहौं जा मैया,  
<a id="line-13"></a>तो कह “जा कहु मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-14"></a>चोरी करत फिरत नित मैया,  
<a id="line-15"></a>दधि माखन चित मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-16"></a>तू छोटो सो मानत मैया,

<a id="line-17"></a>बड़ो होत द्रुत मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-18"></a>कबहुँ पकरि पावूँ जब मैया,  
<a id="line-19"></a>बनि जाय मम पति मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-20"></a>यह “कृपालु” मायावी मैया,  
<a id="line-21"></a>मायापति है मैया, मैया मैया मैया॥

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-22"></a>भावार्थ—किसी ब्रजगोपी ने बालकृष्ण की चंचलता से खीझकर  
<a id="line-23"></a>यशोदा मैया से कहा-अरी यशोदा मैया! तुम्हारे कन्हैया ने तो सारे  
<a id="line-24"></a>ब्रज को सिर पर उठा रखा है! नित्य ही तुम्हारा लाला ब्रजगोपियों  
<a id="line-25"></a>को छेड़ता रहता है। परन्तु तुम तो उसे अत्यन्त भोला-भाला ही  
<a id="line-26"></a>समझती हो। अरी मैया! वह हम सबके गले की माला को तोड़  
<a id="line-27"></a>देता है। जब हम सब सखियाँ जल भरने के लिये यमुना तट पर  
<a id="line-28"></a>जाती हैं, तब हमारे घड़े फोड़ देता है। हमारी सिर की चुनरी भी  
<a id="line-29"></a>वह फाड़ देता है। हे यशोदे! तुम अपने पुत्र की करतूतों को नहीं  
<a id="line-30"></a>जानती हो। कभी तो वह हम सबको अँगूठा दिखाता है, कभी नेत्रों  
<a id="line-31"></a>से कटाक्षपात करता है। कभी “प्यारी” कहकर तो कभी भाभी कहकर  
<a id="line-32"></a>सखियों से हास-परिहास करता है। तुम्हारा लाला देखने में ही  
<a id="line-33"></a>छोटा प्रतीत होता है, बातें तो बड़ों की सी करता है। कभी तो  
<a id="line-34"></a>कहता है कि मेरे साथ अपना विवाह कर लो ऐसा कहकर अत्यन्त  
<a id="line-35"></a>रसपूर्ण ढंग से मुझसे लिपट जाता है। यदि मैं उसे भयभीत करने के  
<a id="line-36"></a>लिये कहती हूँ कि अभी तुम्हारी मैया से शिकायत करने जा रही हूँ  
<a id="line-37"></a>तो निःशंक होकर कहता है-जा जा मैया से कह दे। हे यशोदे! यह  
<a id="line-38"></a>कृष्ण हमारे घर के दही, माखन तो चुराता ही है हमारे चित्त की भी  
<a id="line-39"></a>चोरी करता है। तुम तो अपने पुत्र को छोटा सा बालक ही समझती

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-40"></a>हो परन्तु यह अत्यन्त शीघ्रता से बड़ा हो जाता है। यदि इसे पकड़कर  
<a id="line-41"></a>तुम्हारे पास लाने का विचार करती हूँ तो यह मेरे पति का रूप  
<a id="line-42"></a>धारण कर लेता है। यशोदे! तुम्हारा यह नन्हा सा लाल अत्यन्त  
<a id="line-43"></a>मायावी है। यह “कृपालु” मायापति होने के कारण अपनी माया से  
<a id="line-44"></a>बड़ों-बड़ों को भी नचाता रहता है।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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Unofficial source transcription. Roman transliteration is not an English translation. No missing meanings are generated.
