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Yugal Ras

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युगल माधुरी

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1युगल माधुरी

2ब्रजरस से ओतप्रोत “युगल माधुरी” श्यामा-श्याम संकीर्तन

3संग्रह है। ब्रजरसिकों ने जिस श्री राधा-कृष्ण प्रेम माधुरी

4का वर्णन अपने साहित्य में किया है उसी दिव्य प्रेम रस

5को जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज जी ने अपने कीर्तनों

6में पूर्ण रूपेण समाविष्ट कर दिया है जिसका श्रवण,

7मनन व कीर्तन भावुक भक्तों के हृदयों को श्यामा-श्याम

8की प्रेम रस माधुरी से परिप्लुत कर देता है। इस पुस्तक

9की विशेषता यह है कि संकीर्तनों में ब्रजरस का सिद्धान्त पक्ष भी है और लीला

10पक्ष भी है। श्री कृष्ण तत्व, श्री राधा तत्व, भक्ति तत्व तथा गुरुतत्व जैसे गंभीर

11विषयों का निरूपण अत्यधिक सरसता से किया गया है।

12युगल शतक

13ब्रजरस में सराबोर करने वाला युगल-शतक एक अद्वितीय

14एवं अनुपमेय ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में श्री कृष्ण के पचास पद

15तथा श्री राधारानी के पचास पद संकलित किये गये हैं। कृपा

16स्वरूपा राधारानी के दिव्य धाम बरसाना में (जुलाई अगस्त

17सन् 2000) जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज द्वारा यह

18अमूल्य निधि प्राप्त हुई। इन पदों में निहित रस का रसास्वादन

19तो कोई रसिक ही कर सकता है फिर भी पाठक पढ़ने के बाद

20अनुभव करेंगे, ऐसा रस कभी नहीं मिला। श्री महाराज जी जब नया पद सुनाते हैं तो

21मूर्तिमान रस ही प्रतीत होते हैं। ऐसा लगता है मानो वह रस भी हैं और रसास्वादक

22भी। प्रज्ञा चक्षु वालों के लिए भी और ब्रज रस पिपासु भावुक भक्तों के लिए भी यह

23ग्रन्थ अत्यधिक उपयोगी है क्योंकि इन पदों में केवल लीला-माधुरी

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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