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श्री कृष्ण द्वादशी
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1श्री कृष्ण द्वादशी
2इस पुस्तक में बारह पद हैं। जिनमें आनन्द कंद
3सच्चिदानंद श्रीकृष्णचन्द्र के सांगोपांग शास्त्रीय
4रूपध्यान का दिग्दर्शन कराया गया है। प्रत्येक
5अंग सौन्दर्य चित्रण इतना मनोहारी है कि बहुत
6कम प्रयास से साधक के मानस पटल पर श्री
7कृष्ण की सजीव झाँकी अंकित हो जाती है। अतः प्रत्येक साधक के लिये
8परम उपयोगी है।
9श्री राधा त्रयोदशी
10वृषभानुनन्दिनी रासेश्वरी श्री राधा रानी के प्रेम
11रस सार स्वरूप विग्रह का सांगोपांग चित्रण अत्यन्त
12ही आकर्षक एवं अनूठे ढंग से किया गया है।
13इसमें 13 पद हैं। प्रत्येक पद में मधुरातिमधुर प्रेम
14रस धारा प्रवाहित हो रही है।
15श्री राधा त्रयोदशी एवं श्री कृष्ण द्वादशी का अंग्रेजी
16अनुवाद