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अन्य प्रकाशित पुस्तकें
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1अन्य प्रकाशित पुस्तकें
2प्रेम रस सिद्धान्त
3यह तो आप सब जानते ही हैं कि विश्व का प्रत्येक जीव
4आनंद ही चाहता है किन्तु वह आनंद क्या है? कहाँ है?
5कैसे मिल सकता है। इत्यादि प्रश्नों के सही सही उत्तर न
6जानने के कारण ही सभी जीव उस आनंद से वंचित हैं।
7हिन्दू धर्म ग्रन्थों में अनेक धर्माचार्य हुये एवं उन लोगों ने
8अपने अपने अनुभवों के आधार पर अनेक ग्रन्थ लिखे
9जिनमें परस्पर विरोधाभास सा है। पाठक उन ग्रंथों को
10पढ़कर कुछ भी निश्चय नहीं कर पाता। इतना ही नहीं
11वरन् और भी संशयात्मा हो जाता है।
12इस“प्रेम रस सिद्धान्त”ग्रन्थ की प्रमुख विशेषता यही है कि उन
13समस्त विरोधी सिद्धान्तों का सुंदर सरल भाषा में समन्वय किया गया है।
14आचार्य चरण ने वेदों शास्त्रों के प्रमाणों के अतिरिक्त दैनिक अनुभवों के
15उदाहरणों द्वारा सर्वसाधारण के लाभ को दृष्टिकोण में रखते हुये विषयों का
16निरूपण किया है। वैसे तो ज्ञान की कोई सीमा नहीं है फिर भी इस छोटे से
17ग्रन्थ में जीव का चरम लक्ष्य, जीव एवं माया तथा भगवान् का स्वरूप,
18महापुरुष परिचय, कर्म, ज्ञान, भक्ति साधना आदि का ऐसा निरूपण किया है
19जिसे जन साधारण समझ सकता है। साथ ही समस्त शंकाओं का भी निवारण
20कर सकता है।
21आचार्य चरण किसी संप्रदाय विशेष से संबद्ध नहीं है। अतएव
22उनके इस ग्रन्थ में सभी आचार्यों का सम्मान किया गया है। निराकार, साकार
23ब्रह्म एवं अवतार रहस्य का प्रतिपादन तो अनूठा ही है। अंत में कर्मयोग संबंधी
24प्रतिपादन पर विशेष जोर दिया गया है। क्योंकि सम्पूर्ण संसारी कार्यों को करते
25हुये ही संसारी लोगों को अपना लक्ष्य प्राप्त करना है। इस ग्रन्थ के विषय में