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Yugal Ras

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

होड़ परी पिय प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

Reading 111 of 119 · Source no. 100 · Source PDF 199–201

1होड़ परी पिय प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

2हौँ भाजौँ तुम पकरहु प्यारी

3प्यारिहिँ कह बनवारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

4पुनि तुम भाजहु कह बनवारी,

5हौँ पकरौँ तोहिँ प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

6जो तुम पकरि लेहु मोहिं प्यारी,

7हार्यो हौँ बनवारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

8जो तोहिँ पकरहुँ हौँ बनवारी,

9हारि गईं तुम प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

10जो हारौँ तो हौँ बनवारी,

11ब्याहु करहुँ तोहिं प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

12जो हारहु मो ते तुम प्यारी,

13ब्याहहु तुम बनवारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

14प्यारी कह हौँ कबहुँ न हारी,

15हारेउ नित बनवारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

16करन परेगो तोहिं बनवारी,

17ब्याहु मोहिं कह प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

18भजत पकरि गयो उत बनवारी,

19पकरि गईं इत प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

20जीति सकेउ नहिं उत बनवारी,

21जीति सकीं नहिं प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

22ब्याहु “कृपालु” न करु बनवारी,

23ब्याहु न करु तुम प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी॥

24भावार्थ—आज प्रियतम कृष्ण एवं प्यारी राधा में होड़

25लगी है। प्यारी राधा से प्यारे कृष्ण ने कहा- हे प्यारी! मैं भाग

26रहा हूँ, तुम मुझे पकड़ो। तुम भागो तो मैं तुम्हें पकडूँगा। यदि

27तुम मुझे पकड़ लेती हो तो मैं तुम्हारे समक्ष अपनी पराजय

28स्वीकार कर लूँगा। यदि मैंने तुम्हें पकड़ लिया तो तुम मेरे द्वारा

29पराजित मानी जाओगी। यदि मैं तुमसे पराजित होता हूँ तो तुम्हारे

30साथ विवाह करूँगा यदि तुम मुझसे पराजित होती हो तो तुम

31मेरे साथ विवाह कर लेना। श्री राधा ने उत्तर दिया। हे कृष्ण!

32अभी तक मैं कभी तुमसे पराजित नहीं हुई। सदा ही तुम मेरे

33समक्ष परास्त हुए हो। भोली भाली राधा छली कृष्ण की चाल

34को न समझ सकने से कहने लगीं हे कृष्ण! तुम सदा ही मुझसे

35पराजित होते हो, अतः तुम्हें मेरे साथ विवाह करना पड़ेगा।

36भागते हुए कृष्ण श्री राधा द्वारा पकड़ लिये गये। इधर दौड़ती

37हुई भानुनन्दिनी को नंदनंदन ने पकड़ लिया। न तो श्री कृष्ण ही

38राधा के सम्मुख जीत सके, न ही श्री राधा को विजय श्री प्राप्त

39हुई।“कृपालु”कहते हैं- हे श्री कृष्ण! न तो तुम ही श्री राधा

40से विवाह कर सकते हो न ही श्री राधा तुमसे विवाह कर

41सकेंगी।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

Source edition and PDF · Text version