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Yugal Ras

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क्या समालोचना की जाय बस गागर में सागर के समान ही संपूर्ण तत्त्वज्ञान

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1क्या समालोचना की जाय बस गागर में सागर के समान ही संपूर्ण तत्त्वज्ञान

2भरा है जिसका पात्र जितना बड़ा होगा वह उतना ही बड़ा लाभ ले सकेगा।

3इतना ही निवेदन है कि पाठक एक बार अवश्य पढ़े।

4इस पुस्तक का अनुवाद अंग्रेजी(Philosophy Of Divine

5Love) सिंधी, गुजराती, उड़िया तथा तेलगू भाषा में भी उपलब्ध है।

6प्रेम रस मदिरा

7आनंदकंद श्री कृष्णचंद्र को भी क्रीतदास बना लेने वाला उन्हीं का परमांतरंग

8प्रेम तत्व है तथा यही अन्तिम तत्व है,उसी को लक्ष्य बनाकर प्रेम रस मदिरा

9ग्रन्थ लिखा गया है। इसमें 1008 पद हैं जिनमें श्री कृष्ण की विभिन्न लीलाओं

10का वर्णन,वेद शास्त्र,पुराणादि सम्मत एवं अनेक महापुरुषों की वाणियों के

11मतानुसार किया गया है। सगुण-साकार ब्रह्म की सरस लीलाओं का रस

12वैलक्षण्य विशेषरूपेण श्री कृष्णावतार में ही हुआ है। अतः इन सरस पदों का

13आधार उसी अवतार की लीलाएँ हैं। सगुण-साकार ब्रह्म की सरस लीलाओं

14का रस वैलक्षण्य विशेषरूपेण श्री कृष्णावतार में ही हुआ है। अतः इन सरस

15पदों का आधार उसी अवतार की लीलाएँ है।

16अर्थ सहित इस पुस्तक को दो भागों में प्रकाशित किया गया है।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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