Source edition — see contributor credits
राधा गोविंद गीत
Reading 114 of 119 · Source PDF 204
1राधा गोविंद गीत
2नाना पुराण वेद गोविन्द राधे।
3मत सम्मत यह ग्रन्थ बता दे॥
4सब वैष्णवाचार्य गोविन्द राधे।
5मतों का समन्वय ग्रन्थ में बता दे॥
6ग्यारह हजार एक सौ ग्यारह दोहों के रूप में, दो भागों में प्रकाशित, यह एक
7अद्वितीय एवं अनुपमेय ग्रन्थ है। वेद, पुराण, शास्त्र सभी का मन्थन करके ज्ञान
8के अगाध अपरिमेय समुद्र से आचार्य श्री ने कुछ रत्न निकालकर सामने रख
9दिये। इतनी सरल भाषा है जो सर्वधारण को भी ग्राह्य है। वेदव्यास ने वेदों को
10सरल रूप में पुराण के रूप में प्रगट किया, किन्तु “राधा गोविन्द गीत” में तो
11सभी शास्त्रों, वेदों पुराणों का सार है। आश्चर्य की बात तो यह है कि सभी
12दोहे चलते फिरते ही हँसी खेल में ही बने हैं। भगवत्क्षेत्र सम्बन्धी कोई भी
13प्रश्न ऐसा नहीं है जिसका उत्तर इसमें न हो। सौभाग्यशाली पाठक जब कभी
14इसे पढ़ेंगे तब स्वयं अनुभव करेंगे कि कितनी बड़ी ज्ञान राशि उनके हाथ में
15है
16जो अगणित जन्म माथा पच्ची करने के बाद भी प्राप्त न हो पाती। कलियुग
17में दैहिक, दैविक भौतिक तापों से तपे हुये जीवों के लिये यह ग्रन्थ अत्यधिक
18उपयोगी है।
19भक्ति शतक
20श्री राधाकृष्ण संबंधी भक्ति मार्गीय सिद्धान्तों से युक्त
21इस ग्रन्थ में 100 दोहे हैं। प्रत्येक दोहे की व्याख्या भी
22लिखी गई है। सभी शास्त्रों वेदों का सार इन दोहों में
23लिख दिया गया है।