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Yugal Ras

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

मम ठाकुर नंदकुमार, मम ठकुरानी सुकुमार।

Reading 13 of 119 · Source no. 2 · Source PDF 17–18

1मम ठाकुर नंदकुमार, मम ठकुरानी सुकुमार।

2मम दोऊ प्राणाधार, जय जयति युगल सरकार॥

3बस नंदगाम रिझवार, बस बरसानो सुकुमार।

4वंृदावन करत बिहार, जय जयति युगल सरकार॥

5नीलो तनु नंदकुमार, पीलो तनु भानुदुलार।

6दोउ चित सुख घन तन धार, जय जयति युगल सरकार॥

7पीलो पट नंदकुमार, नीलो पट भानुदुलार।

8दोउ लीला अपरंपार, जय जयति युगल सरकार॥

9नट भेष ब्रजेन्द्र कुमार, सोरह सिँगार सुकुमार।

10दोउ भल गलबाहीँ डार, जय जयति युगल सरकार॥

11दोउ ब्रह्मरूप साकार, दोउ दिव्य प्रेम अवतार।

12दोउ रूप सुधा रस सार, जय जयति युगल सरकार॥

13भज प्यारिहिँ नंदकुमार, भज प्यारिहुँ पिय रिझवार।

14दोउ सुख महँ दोउ बलिहार, जय जयति युगल सरकार॥

15दोउ छवि पर छवि बलिहार, दोउ निज मन मोहनहार।

16दोउ तनु बह ब्रजरस धार, दोउ मम “कृपालु” सरकार॥

17भावार्थ— भक्त कहता है-मेरे आराध्य नंदनंदन श्री

18कृष्ण हैं। मेरी आराध्या सुकुमारी राधा हैं। दोनों ही मेरे प्राणों

19के अवलम्ब हैं। युगल सरकार की सदा ही जय हो। श्री कृष्ण

20नंदग्राम में निवास करते हैं। श्री राधा ने बरसाना धाम अपना

21वासस्थल बनाया है। वृन्दावन दोनों की विहार स्थली है। युगल

22सरकार सदा जय को प्राप्त हो। नंदनंदन का दिव्य वपु नील

23वर्ण का है। भानुनन्दिनी का चिन्मय तनु पीत वर्ण का है। दोनों

24का ही शरीर चित एवं सुखघन रूप है। युगल सरकार की

25सदैव विजय हो। नंदनंदन पीत वस्त्र धारण करते हैं। भानुनन्दिनी

26को नीले रंग की साड़ी प्रिय है। दोनों की लीला अपार है।

27युगल सरकार की सदा जय हो। ब्रजेन्द्रनंदन नटवर वेष से

28सुशोभित होते हैं। श्री राधा सोलह शृंगार से युक्त हैं। गलबाँहीं

29देकर दोनों अतीव शोभा को प्राप्त हो रहे हैं। युगल सरकार की

30जय हो। दोनों ही साक्षात् ब्रह्मस्वरूप हैं। दोनों ही दिव्य प्रेम के

31अवतार हैं। दोनों का रूप अमृत का सार स्वरूप है। युगल

32सरकार की जय हो। नंदपुत्र श्री राधा का सेवन करते हैं। श्री

33राधा रसिक शेखर श्री कृष्ण की उपासना करती हैं। दोनों दोनों

34के सुख पर बलिहार जाते हैं। युगल सरकार की जय हो। दोनों

35के सौन्दर्य को देखकर सौन्दर्य बलिहार जाता है। दोनों अपने

36ही मन को मोहित करते हैं। दोनों के शरीर से ब्रजरस की धारा

37प्रवाहित होती रहती है।“कृपालु”कहते हैं- दोनों ही मेरे इष्ट

38हैं।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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