Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
मम ठाकुर श्यामा श्याम, दोउ पूर्णब्रह्म सुखधाम।
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1मम ठाकुर श्यामा श्याम, दोउ पूर्णब्रह्म सुखधाम।
2दोउ पूर्णकाम अभिराम, राजत वृंदावन धाम॥
3श्यामा सेवा चह श्याम, श्यामा चह सेवा श्याम।
4दोउ चह दोउ सुख वसु याम, राजत वृंदावन धाम॥
5आनँदघन श्यामा श्याम, आनँदघन तन अभिराम।
6सुख को दे सुख सुखधाम, राजत वृंदावन धाम॥
7नँदगाम धाम घनश्याम, बरसानो श्यामा धाम।
8सँग सखन सखिन वसु याम, राजत वृंदावन धाम॥
9तनु नील वरन घनश्याम, तनु गोरी श्यामा बाम।
10दोउ एक रूप द्वै नाम, राजत वृंदावन धाम॥
11चंचल ते चंचल श्याम, अति भोरी श्यामा बाम।
12दोउ रिझवत दोउ वसु याम, राजत वृंदावन धाम॥
13दोउ प्रेमसिंधु सुखधाम, दोउ कृपा सिंधु अभिराम।
14दोउ दीनबंधु छविधाम, राजत वृंदावन धाम॥
15श्यामा को भजु कह श्याम, श्यामा कह भजु घनश्याम।
16सखि कह भजु दोउ वसु याम, राजत वृंदावन धाम॥
17दोउ रस हैं श्यामा श्याम, दोउ रसिक प्रेम अभिराम।
18दोउ जीवन धन ब्रजबाम, राजत “कृपालु” ब्रजधाम॥
19भावार्थ— मेरे आराध्य श्यामा श्याम हैं। दोनों ही
20सुखसागर हैं। पूर्णब्रह्म स्वरूप हैं। अत्यन्त ही शोभाशाली हैं।
21समस्त लौकिक वासनाओं से रहित हैं। स्वयं में ही परिपूर्ण हैं।
22ऐसे युगल सरकार दिव्य वृन्दावन धाम में विराजमान हैं।
23श्यामसुन्दर सदैव श्री राधा की सेवा-हेतु उत्कंठित रहते हैं। श्री
24राधा भी निरन्तर प्रियतम की सेवा-वासना से चिंतित रहती हैं।
25रात-दिन दोनों ही दोनों को सुख देने को तत्पर रहते हैं। ऐसे
26प्रेमावतार युगल सरकार सदा वृन्दावन धाम में शोभित होते हैं।
27श्यामा श्याम आनन्दघन स्वरूप हैं। उनका शरीर और उनकी
28आत्मा एक ही हैं अर्थात् वे देह देही के अन्तर से रहित हैं। ये
29सुख को भी सुख प्रदान करने वाले स्वयं सुख स्वरूप ही हैं।
30ऐेसे युगल सरकार सदा सदा वृन्दावन धाम में विराजमान रहते
31हैं। लीला की दृष्टि से नंदनंदन श्री कृष्ण ने नंदग्राम में वास
32किया। भानुनन्दिनी राधा ने बरसाना ग्राम को अपनी क्रीड़ा स्थली
33बनाया। श्री कृष्ण के साथ श्रीदामा, मधुमंगल आदि सखा एवं
34श्री राधा के साथ ललिता, विशाखा आदि सखियाँ सदा ही
35वृन्दावन धाम में रहकर युगल सरकार की लीला में सहयोग
36प्रदान करते हैं। श्री कृष्ण का शरीर नील वर्ण का है श्री राधा
37गौर वर्ण की हैं। दोनों के नाम ही पृथक् पृथक् हैं। तत्वतः तो
38दोनों एक ही रूप हैं। ऐसे युगल सरकार वृन्दावन में नित्य ही
39विराजमान हैं। श्यामसुन्दर अत्यंत चंचल हैं। श्री राधा अत्यंत
40भोली हैं। दोनों की प्रत्येक चेष्टा दोनों की प्रसन्नता के हेतु ही
41होती है। ऐसे श्यामा श्याम सदा वृन्दावन धाम में निवास करते
42हैं। सुख के धाम श्यामा श्याम प्रेम के समुद्र हैं। यह अभिनव
43जोड़ी कृपा की भी सागर है। छवि की खान श्यामा श्याम अनन्त
44दिव्य कल्याणमय गुण गण युक्त होकर भी सदा दीनों को अपनाते
45रहते हैं। श्यामसुन्दर कहते हैं कि राधा की उपासना करो। श्री
46राधा की अनुमति से श्री कृष्ण का भजन करणीय है। ब्रजांगनाओं
47की दृष्टि से तो नित्य वृन्दावन धाम में विराजमान युगल सरकार
48ही भजनीय हैं। श्यामा-श्याम दोनों ही रस-रूप होकर भी रस
49के रसिक भी हैं। दोनों ही शुद्ध प्रेम के पिपासु हैं। दोनों ही
50ब्रज-गोपियों के जीवन-सर्वस्व हैं। ये युगल-सरकार नित्य
51ब्रजमंडल में विचरण करते रहते हैं।