# मम ठाकुर नंदकुमार, मम ठकुरानी सुकुमार।

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

Source ID: native-yugal-ras-2005:yugal-ras-2005-kirtan-002
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Book: Yugal Ras
Source edition: 16-hi-2005; SHA-256 4bb470b1f96249e40eb21d96cd2bb6b8eec203f5ed370df4843197140ad5ea16
Source PDF pages: 17–18



<a id="line-1"></a>मम ठाकुर नंदकुमार, मम ठकुरानी सुकुमार।  
<a id="line-2"></a>मम दोऊ प्राणाधार, जय जयति युगल सरकार॥  
<a id="line-3"></a>बस नंदगाम रिझवार, बस बरसानो सुकुमार।  
<a id="line-4"></a>वंृदावन करत बिहार, जय जयति युगल सरकार॥  
<a id="line-5"></a>नीलो तनु नंदकुमार, पीलो तनु भानुदुलार।  
<a id="line-6"></a>दोउ चित सुख घन तन धार, जय जयति युगल सरकार॥  
<a id="line-7"></a>पीलो पट नंदकुमार, नीलो पट भानुदुलार।  
<a id="line-8"></a>दोउ लीला अपरंपार, जय जयति युगल सरकार॥  
<a id="line-9"></a>नट भेष ब्रजेन्द्र कुमार, सोरह सिँगार सुकुमार।  
<a id="line-10"></a>दोउ भल गलबाहीँ डार, जय जयति युगल सरकार॥  
<a id="line-11"></a>दोउ ब्रह्मरूप साकार, दोउ दिव्य प्रेम अवतार।  
<a id="line-12"></a>दोउ रूप सुधा रस सार, जय जयति युगल सरकार॥  
<a id="line-13"></a>भज प्यारिहिँ नंदकुमार, भज प्यारिहुँ पिय रिझवार।  
<a id="line-14"></a>दोउ सुख महँ दोउ बलिहार, जय जयति युगल सरकार॥  
<a id="line-15"></a>दोउ छवि पर छवि बलिहार, दोउ निज मन मोहनहार।  
<a id="line-16"></a>दोउ तनु बह ब्रजरस धार, दोउ मम “कृपालु” सरकार॥

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-17"></a>भावार्थ— भक्त कहता है-मेरे आराध्य नंदनंदन श्री  
<a id="line-18"></a>कृष्ण हैं। मेरी आराध्या सुकुमारी राधा हैं। दोनों ही मेरे प्राणों  
<a id="line-19"></a>के अवलम्ब हैं। युगल सरकार की सदा ही जय हो। श्री कृष्ण  
<a id="line-20"></a>नंदग्राम में निवास करते हैं। श्री राधा ने बरसाना धाम अपना  
<a id="line-21"></a>वासस्थल बनाया है। वृन्दावन दोनों की विहार स्थली है। युगल

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-22"></a>सरकार सदा जय को प्राप्त हो। नंदनंदन का दिव्य वपु नील  
<a id="line-23"></a>वर्ण का है। भानुनन्दिनी का चिन्मय तनु पीत वर्ण का है। दोनों  
<a id="line-24"></a>का ही शरीर चित एवं सुखघन रूप है। युगल सरकार की  
<a id="line-25"></a>सदैव विजय हो। नंदनंदन पीत वस्त्र धारण करते हैं। भानुनन्दिनी  
<a id="line-26"></a>को नीले रंग की साड़ी प्रिय है। दोनों की लीला अपार है।  
<a id="line-27"></a>युगल सरकार की सदा जय हो। ब्रजेन्द्रनंदन नटवर वेष से  
<a id="line-28"></a>सुशोभित होते हैं। श्री राधा सोलह शृंगार से युक्त हैं। गलबाँहीं  
<a id="line-29"></a>देकर दोनों अतीव शोभा को प्राप्त हो रहे हैं। युगल सरकार की  
<a id="line-30"></a>जय हो। दोनों ही साक्षात् ब्रह्मस्वरूप हैं। दोनों ही दिव्य प्रेम के  
<a id="line-31"></a>अवतार हैं। दोनों का रूप अमृत का सार स्वरूप है। युगल  
<a id="line-32"></a>सरकार की जय हो। नंदपुत्र श्री राधा का सेवन करते हैं। श्री  
<a id="line-33"></a>राधा रसिक शेखर श्री कृष्ण की उपासना करती हैं। दोनों दोनों  
<a id="line-34"></a>के सुख पर बलिहार जाते हैं। युगल सरकार की जय हो। दोनों  
<a id="line-35"></a>के सौन्दर्य को देखकर सौन्दर्य बलिहार जाता है। दोनों अपने  
<a id="line-36"></a>ही मन को मोहित करते हैं। दोनों के शरीर से ब्रजरस की धारा  
<a id="line-37"></a>प्रवाहित होती रहती है।“कृपालु”कहते हैं- दोनों ही मेरे इष्ट  
<a id="line-38"></a>हैं।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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