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Yugal Madhuri

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

साधना करु साधना करु साधना करु प्यारे।

Reading 73 of 75 · Source no. 62 · Source PDF 227–230

1साधना करु साधना करु साधना करु प्यारे।

2साधना ते ही मिले तोहिं, साध्य हरि रति प्यारे।

3प्रथम श्रद्धा युक्त हो जा, शरण गुरु पद प्यारे।

4गुरु की बुधि में जोड़ निज बुधि, है शरण यह प्यारे।

5ग्रन्थ पढ़ु जनि बहुत सुनु जनि, संत मत बहु प्यारे।

6ब्रह्म माया जीव का करु, ज्ञान गुरु सों प्यारे।

7सेव्य सों सम्बन्ध अपनो, जानु गुरु सों प्यारे।

8हरि में गुरु में भेद जनि, लवलेश मानहु प्यारे।

9साधना में है प्रमुख मन, इन्द्रियाँ नहिं प्यारे।

10मोक्ष अरु बंधन का कारण, एक मन ही प्यारे।

11प्रथम करु हरि ध्यान मन ते, जैसी रुचि हो प्यारे।

12ध्यान ही है साधना का, प्राण जीवन प्यारे।

13ध्यान बिनु सब साधना है, प्राण बिनु तनु प्यारे।

14मन को जो भाये बना लो, रूप वैसा प्यारे।

15मनहिं ते शृंगार करु सब, जैसा भाए प्यारे।

16सामने हरि को बिठा कर, साधना करु प्यारे।

17नाम गुण लीलादि कीर्तन, साथ में करु प्यारे।

18परम व्याकुलता बढ़ाओ, हरि दरस की प्यारे।

19रो के उनते प्रेम माँगो, दरस माँगो प्यारे।

20ह्वै के अति व्याकुल करहु नित, करुण क्रन्दन प्यारे।

21दरस हित लग एक पलहूँ, कलप सम तोहिं प्यारे।

22जितनो तू कर प्यार तितनो, प्यार कर तोहिं प्यारे।

23प्यार ही सों प्यार कर पिय, प्यार चाकर प्यारे।

24जगत ते मन को हटा कर, लगा हरि में प्यारे।

25इसी का अभ्यास पुनि पुनि, करु निरन्तर प्यारे।

26श्वास जब खींचो तो “रा” कहु, मनहिं मन महँ प्यारे।

27श्वास छोड़ो तो कहहु “धे”, ध्यान भी करु प्यारे।

28जग में कतहूँ राग जनि करु, द्वेष जनि करु प्यारे।

29मन को मानो शत्रु उसकी, सुनहु जनि कछु प्यारे।

30मन जहाँ भी जाय हरि को, खड़ो करु तहँ प्यारे।

31गौर रस अरु श्याम रस दोउ, एक करि पिउ प्यारे।

32रस की शीशी में युगल रस, भर के पी नित प्यारे।

33ना भरे ना खाली हो अस, रस की प्याली प्यारे।

34चर अचर में लखहु अपनो, इष्ट कहँ नित प्यारे।

35सर्वदा सर्वत्र हरि को, साथ मानहु प्यारे।

36आपु को इकलो कबहुँ जनि, मानु मन महँ प्यारे।

37सोचु मन यह कर्म मम सब, लखत हरि गुरु प्यारे।

38माँगु जनि उन भुक्ति मुक्तिन, भूलिहूँ तुम प्यारे।

39उनकी सेवा ही चहहु नित, अष्टयामी प्यारे।

40उनका सुख ही चहहु निशि दिन, सुख न निज चहु प्यारे।

41उनकी इच्छा में ही अपनी, राखु इच्छा प्यारे।

42तन ते मन ते धन ते गुरु की, करहु सेवा प्यारे।

43तृण ते बढ़कर दीनता उर, राखु नित ही प्यारे।

44वृक्ष ते बढ़कर दीनता उर, राखु नित ही प्यारे।

45सब को दो सम्मान आपुन, मान जनि चहु प्यारे।

46भूलिहूँ दुर्भावना कहुँ, हो न सपनेहुँ प्यारे।

47लखहु जनि परदोष कबहूँ, दोष निज लखु प्यारे।

48सदा सोचहु जाने कब छिन, जाय तनु यह प्यारे।

49हरि में गुरु में ही रहे नित, रक्त तव मन प्यारे।

50हरि दरस दे या न दे तुम, रोते जाओ प्यारे।

51एक दिन अइहैं इहै, विश्वास राखहु प्यारे।

52कृपा की नित बाट जोहो, कृपा होगी प्यारे।

53कबहुँ तो लैहैं कृपा करि, सुधि “कृपालुहुँ” प्यारे।

Original Hindi songs from the supplied standalone Yugal Madhuri edition. This is distinct from Prem Ras Madira's similarly named chapter. Frontmatter retains its own source credits. Supplied edition: Fifth edition, Gita Jayanti, 28 November 2009.

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