Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्यामा जू की, छवि पर छवि बलिहार।
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1१३.
2श्यामा जू की, छवि पर छवि बलिहार।
3सिर पर कनक मुकुट मणि मण्डित, बहुरंगी छविदार।
4चारु चन्द्रिका चम चम चमकति, स्वामिनि गौर लिलार।
5बिन्दी भाल लाल श्रुति कुण्डल, झलमल झलक निहार।
6नासा मुक्ताहल नथ बेसर, गल मुक्तन मणि हार।
7चिबुक श्याम तिल मुख मृदु मुसकनि, कटि किंकिन झनकार।
8अरुण कंचुकी नीलाम्बर दुति, सुबरन जरिन किनार।
9कह ‘कृपालु’ मिलि गौर देह दुति, करति रंग बौछार।
10भावार्थ: किशोरी राधिका की छवि को देख कर छवि भी स्वयं को न्यौछावर
11कर देती है। विविध रंगों के मणियों से मण्डित स्वर्ण का मुकुट सिर पर
12शोभायमान है। स्वामिनी राधिका के गौर ललाट पर सुन्दर चन्द्रिका चमचमा
13रही है। मस्तक पर लाल रंग का सौभाग्य चिह्न एवं कानों में कुण्डल झलमला
14रहे हैं। सुघर नासिका में नथ एवं बेसर का मोती अपनी अनूठी आभा प्रसारित
15कर रहा है। कण्ठ में मुक्ता एवं मणियों के हार झूल रहे हैं। सुन्दर ठोढ़ी पर
16श्याम रंग का तिल शोभित है। मुख मन्द मुसकान से युक्त है। क्षीण कटि
17किंकिणी से झंकृत है। वक्ष पर अरुणवर्ण की अंगिया अलंकृत है। स्वर्णिम
18जरी की किनारी से युक्त नीली साड़ी से अधो अंग आवृत्त है। श्री ‘कृपालु जी’
19कहते हैं-गौरांगी राधा की देह दुति रंगों की बौछार सी कर रही है।